करीब तीन साल बाद एक बार फिर मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) में रैगिंग का मामला सामने आया है। मामले की शिकायत यूजीसी की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर 31 मार्च को दर्ज कराई गई है। जिसके बाद मामले में यूजीसी ने मैनिट के डायरेक्टर नरेंद्र सिंह रघुवंशी को मेल भेजकर रैगिंग की घटना को लेकर आंसर मांगा है। मामले में मैनिट की प्रोक्टोरियल बोर्ड की चेयरपर्सन सीएम कृष्णा का कहना है कि हेल्पलाइन से रैगिंग की शिकायत मिली है।
इस मामले में जांच की जा रही है। सोमवार को सीनियर छात्रों की तलाश कर उनसे पूछताछ की जाएगी। जिसके बाद मामले में स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसमें प्रथम और दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों ने हेल्पलाइन को ई मेल कर बताया है कि सीनियर हॉस्टल में आकर आये दिन रैगिंग लेते हैं। इससे वे मानसिक तौर पर प्रताड़ित हो रहे हैं। यहां तक सीनियर मारपीट कर रहे हैं। जबरदस्ती शराब, सिगरेट पिलाने और नहीं पीने पर लगातार थप्पड़ मारने के आरोप लगाए गए हैं।
इधर इंदौर में रैगिंग से परेशान MBBS के फर्स्ट ईयर के छात्र के सुसाइड मामले में दो सीनियर छात्र सहित कॉलेज के डीन जीएस पटेल पर केस दर्ज किया गया है। FIR के बाद मृतक के पिता ने बताया कि मेरे बेटे ने कॉलेज के डीन से सीनियर्स द्वारा की जा रही रैगिंग की शिकायत की थी, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के इस स्टूडेंट/ छात्र ने सुसाइड से पहले अपने पिता को फोन कर सीनियर्स द्वारा दी जा रही प्रताड़ना के बारे में बताया था। उसने कहा था...
'पापा... मैं बहुत परेशान हो गया हूं, मुझे हॉस्टल में नहीं रहना है। यहां सीनियर रैगिंग ले रहे हैं। रोज मुझे कपड़े उतार कर दीवार पर खड़ा कर देते हैं। उसी हालत में घंटों खड़ा रखते हैं। पेंसिल-पेन लेकर गंदी हरकत करते हैं। पूछते हैं तेरी गर्लफ्रेंड है या नहीं। पोर्न फिल्म भी दिखाते हैं।
दैनिक bhaskar की रिपोर्ट के मुताबिक़ सीनियर रोज रात चेतन को कमरे में बुलाते थे उज्जैन जिले की बड़नगर निवासी चेतन पाटीदार (22) इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट था। भास्कर समूह से चर्चा करते हुए मृतक के मौसा विजय ने बताया कि 28 फरवरी को चेतन का एडमिशन(प्रवेश) कराया गया था। इसके बाद कॉलेज के सीनियर स्टूडेंट उसे लगातार परेशान कर रहे थे। सीनियर रोजाना रात में उसे अपने कमरे में बुलाते थे। चेतन को पूरे कपड़े उतारने का फरमान सुनाते और उसके बाद प्रताड़ना का दौर कई घंटे तक चलता रहता। इस बारे में चेतन ने पिता दिनेश पाटीदार को बताया था। तब उन्होंने इसकी शिकायत डीन से करने को कहा था।
26 मार्च को डीन के पास आवेदन लेकर गया था
पुलिस का कहना है, चेतन ने 26 मार्च को डीन जीएस पटेल को हॉस्टल में नहीं रहने से संबंधित आवेदन दिया था, लेकिन डीन ने साफ मना कर दिया। बताया जाता है कि, कॉलेज संचालक को हॉस्टल के लिए मोटी फीस मिलती है। इस कारण वे छात्र को हॉस्टल खाली नहीं करने देते। छात्र के सुसाइड मामले में शुक्रवार देर रात कॉलेज के दो सीनियर छात्रों दुर्गेश हाड़ा और रोमिल सिंह सहित कॉलेज के डीन जीएस पटेल पर धारा 306 के तहत केस दर्ज किया गया है।
कॉलेज डीन से सीधे कोश्चन …
कोश्चन - आप पर जो आरोप लग रहे हैं वह क्या सही है?
आंसर - अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा , क्योंकि पुलिस अभी जांच कर रही है।
कोश्चन - क्या चेतन ने आपसे हॉस्टल में नहीं रहने या हॉस्टल बदलने के बारे में पूछा था?
आंसर -- नहीं ऐसा कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन जांच चल रही है इसलिए मुझे कुछ नहीं कहना है।
फिर दोहराया गया कोश्चन
कोश्चन - क्या चेतन ने आपसे हॉस्टल में ना रहने की बात कही थी?
आंसर -- हमारे ऑफिस में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।
कोश्चन - परिवार तो आरोप लगा रहा है।
आंसर -- वह कैसे कह सकते हैं कि चेतन यहां आया था। यदि उनके पास कोई प्रूफ है, तो अलग बात है, यहां किसी प्रकार का कोई सबूत नहीं है।
डर इतना कि फोन तक बंद रखता था
चेतन के पिता ने बताया, 28 मार्च को मेरी चेतन से बात हुई तो मैंने पूछा कहां हो? तब उसने कहा था कि कॉलेज की कैंटीन में नाश्ता कर रहा हूं। आखिरी बार 29 मार्च यानी सुसाइड करने से चंद घंटे पहले बात हुई थी। तब वह काफी डरा-डरा और धीमी आवाज में बात कर रहा था। कुछ देर बात करने के बाद उसने फोन काट दिया।
पिता के अनुसार, सीनियर उसे लगातार फोन करके परेशान करते थे। होली पर जब वो घर आया तब यहां भी उसके सीनियर का फोन आया था। मैंने नाम नहीं पूछा था। सीनियर ने पूछा- कहां हो? तब उसने घर पर होने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके बाद लगातार फोन आते रहे। मजबूरन चेतन को सिम बंद करना पड़ा।
स्टडी में अच्छा था चेतन
परिजनों ने बताया कि चेतन स्टडी में अच्छा था। 12वीं में उसके 75% नंबर आए थे। इस कारण से उसे MBBS में एडमिशन(प्रवेश) मिला था। उसे इंडेक्स कॉलेज मिला। 13 लाख रुपए की स्कॉलरशिप भी मिली। 1 लाख 70 हजार रुपए हॉस्टल के देने थे, जो पहले ही जमा करा दिए थे। चेतन के पिता उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के मौलाना में ही खेती करते हैं। बड़ा भाई दीपक भी पिता का हाथ बंटाता है। चेतन की दो बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। परिवार का सपना, एक बेटे को डॉक्टर बनाने का था, इसलिए चेतन को स्टडी के लिए इंदौर भेजा था। हॉस्टल की फीस भरने के लिए पिता ने दो लाख रुपए में जमीन भी बेची थी।