पक्ष में हालात लेकिन अपने ही खिलाफ
मौजूदा हालातों के चलते कांग्रेस कश्मीरी पंडित कार्ड के नाम पर विवेक तन्खा को राज्यसभा भेज सकती है। उनकी पैरवी कमलनाथ और दिग्विजय सिंह कर सकते है लेकिन मप्र कांग्रेस के ही कई नेता उनके पक्ष में नहीं है। दूसरी तरफ भाजपा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को अब मप्र से राज्यसभा में भेजा सकती है। जबकि एक अन्य सीट पर ओबीसी चेहरे को राज्यसभा की टिकट देकर चुनावी संदेश देने के बारे में सोचा जा रहा है।
जमीन तैयार कर रहे तन्खा
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पहले विवेक तन्खा की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद उनके पक्ष में हालात बनने लगे हैं। उनका कार्यकाल 29 जून को समाप्त होने वाला है। पार्टी तन्खा को दोबारा राज्यसभा में भेजकर यह बताना चाहेगी कि कांग्रेस ही कश्मीरी पंडितों की हितैषी है। दरअसल तन्खा एकमात्र कश्मीरी पंडित हैं जो राज्यसभा सांसद हैं। मगर तन्खा के साथ मुश्किल यह हो सकती है कि मप्र कांग्रेस के कई नेता उन्हें फिर से राज्यसभा टिकट के पक्ष में नहीं हैं। कुछ तो खुलकर इस पर कहने से नहीं चूक रहे है। तन्खा का जी- 23 गुट के प्रमुख नेताओं से निकटता का नाता भी उछाला जा रहा है। उन्हें कांग्रेस हाईकमान पर तीखी टिप्पणी करने वाले कपिल सिब्बल का करीबी माना जाता है। मप्र कांग्रेस के कई नेता संगठन से जुड़े किसी नेता को राज्यसभा में भेजने का अभियान चलाने के मूड में हैं।
हालांकि तन्खा भी इस कठिनाई से अवगत है लिहाजा वे फिर राज्यसभा पहुंचने की जमीन पुख्ता करने में जुटे हैं। उनके पास नाथ-दिग्विजय का समर्थन भी है। वे राज्यसभा में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास का प्राइवेट बिल पेश कर चुके हैं। विधेयक में कश्मीरी पंडितों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पुनवांस, उनकी संपत्ति की सुरक्षा, उनकी सांस्कृतिक विरासत की बहाली, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने, उनके पुनर्वास पैकेज का प्रावधान और उससे जुड़े या उसके प्रासंगिक मामलों का प्रावधान है।
भाजपा से गोयल का नाम
भाजपा सूत्रों का कहना है कि एमजे अकबर के स्थान पर पार्टी अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को दोबारा राज्यसभा भेजेगी। क्योंकि वे मोदी सरकार में वाणिज्य मंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं। गोयल का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है। वे राज्यसभा में सदन के नेता हैं। उन्हें पिछले साल जुलाई में थावरचंद गहलोत के कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
तीन का कार्यकाल होगा खत्म
दरअसल, मप्र कोटे से राज्यसभा सदस्य बने पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर, सम्पतिया उइके और कांग्रेस के विवेक कृष्ण तन्खा का कार्यकाल 29 जून को खत्म हो रहा है। मप्र में राज्यसभा की 11 सीटें हैं, इनमें से आठ पर भाजपा का कब्जा है। तीन सीट पर कांग्रेस काबिज है। मप्र विधानसभा में सदस्यों की मौजूदा संख्या के हिसाब से भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलेगी।