यूरोप और एशिया के बीच लाल सागर ही व्यापार का मुख्य समुद्री रास्ता है. इससे स्वेज नहर के रास्ते होने वाले कारोबार पर भी खतरा पैदा हो गया है. करीब 193 किमी लंबी इस नहर का ग्लोबल ट्रेड में 12 फीसदी योगदान है. दुनिया का 30 परसेंट कंटेनर मूवमेंट इसी रास्ते से होता है. हूती विद्रोही अब तक 13 जहाजों पर ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलों से हमला कर चुके हैं.
स्वेज नहर (Suez Canal) न सिर्फ भारत के लिए बल्कि विश्व व्यापार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. इस नहर से हमेशा व्यापारिक जहाजों की आवाजाही होती रहती है. लेकिन, यह नहर एक बार फिर खतरे में आ गई है.
इजरायल-हमास युद्ध के बीच यमन का हूती विद्रोही नहर से गुजरने वाले जहाजों पर हमला कर रहा है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है. फिलहाल, भारत भी इसका असर झेल रहा है.
यमन का हूती विद्रोही स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है. हूती के हमलावर लगातार कई जहाजों पर मिसाइल हमले कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार के लिए तथाकथित मुख्य मार्ग प्रभावित हो रहा है और शिपिंग कंपनियां इस मार्ग पर जाने से बच रही हैं.
स्वेज नहर वैश्विक व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण-
स्वेज नहर की बात करें तो इसकी भौगोलिक स्थिति बेहद रणनीति से भरी हुई है. एशिया और यूरोप के बीच 192 किमी लंबी स्वेज नहर से बहुत कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा जा सकता है.
वोर्टेक्स के आंकड़ों के अनुसार, 2023 की पहली छमाही में स्वेज नहर के माध्यम से कच्चे तेल के व्यापार की कुल मात्रा लगभग 9.2 मिलियन बैरल थी, जो कुल वैश्विक मांग के 9 प्रतिशत के बराबर है. विश्व की एलएनजी आवश्यकता का लगभग 4 प्रतिशत का व्यापार इसी नहर के माध्यम से किया जाता है.
भारत के 200 अरब डॉलर के निर्यात पर असर-
एक अनुमान के मुताबिक, भारत स्वेज नहर के जरिए हर साल 200 अरब डॉलर का निर्यात करता है. भारत इस नहर के माध्यम से ऑटोमोटिव पार्ट्स, कृषि उत्पाद, रसायन, कपड़ा, तैयार कपड़े, फार्मास्युटिकल उत्पाद आदि का निर्यात करता है. यमन के हूती विद्रोह के हमलावरों द्वारा स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले के बाद भारत के निर्यात पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है.