नए साल के दिन सोमवार एक जनवरी को जापान में लगातार 155 भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसमें मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 64 हो चुकी है। मलबे और टूटी हुई सड़के बचाव कार्य में बाधा बन रही है। अब बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा कि सरकार ने क्षतिग्रस्त इलाकों में बचाव कार्य करने वाले एसडीएफ कर्मियों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।
भूकंप के कारण इशीकावा प्रांत के वाजिमा शहर में कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में आग भी लग गई। हालांकि, अब तक कितनी क्षति हो चुकी है इसका आकलन अभी तक नहीं हो पाया है। जापान के मौसम विभाग ने भूकंप के बाद गुरुवार को रुक-रुक कर बारिश के साथ भूस्खलन की संभावना जताई है। जापान के रक्षाबलों (जेएसडीएफ) को क्षतिग्रस्त इलाकों में बचाव कार्य के लिए भेज दिया गया है।
जापान में सोमवार को 90 मिनट के अंदर रिक्टर स्केल पर 4.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए थे । एक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 मापी गई। भूकंपीय गतिविधियों के बाद 34,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बंद हो गई थी।
भारतीय दूतावास ने शुरू की इमरजेंसी हेल्पलाइन सर्विस
एनएचके पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा था कि अधिकारी भूकंप से हुए नुकसान आकलन कर रहे हैं। नागरिकों को भूकंप के और संभावित झटकों के लिए तैयार रहने की जरूरत है। पीएम किशिदा ने कहा, जहां सुनामी आने की आशंका है, वे जल्द से जल्द इलाके से बाहर चले जाएं। जापान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया है।