भोपाल। प्रदेश के 895 वन ग्रामों में अधोसंरचना विकास हेतु बारह साल पहले खर्च किये गये 268 करोड़ 50 लाख रुपये की वन विभाग के प्रधान मुख्य वनसंरक्षक रमेश कुमार गुप्ता द्वारा अब पड़ताल शुरु की गई है। उन्होंने सभी समस्त मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय), क्षेत्र संचालक टाईगर रिजर्व/संचालक राष्ट्रीय उद्यान एवं वनमण्डलाधिकारी को पत्र जारी कर कहा है कि वे इस व्यय की वर्तमान स्थिति से अवगत करायें।
पत्र में कहा गया है कि वन विभाग द्वारा समग्र वन ग्राम विकास योजना के तहत प्रदेश के 935 वन ग्रामों में से 30 वीरान वनग्रामों को छोडक़र शेष 895 वन ग्रामों में 30 लाख राशि प्रति वन ग्राम के मान से (कुल 268 करोड़ 50 लाख रुपये) अधोसंरचना कार्य स्वीकृत किये गये थे। इसके अतिरिक्त लघुवनोपज संघ द्वारा अधोसंरचना विकास, कैम्पा मद से आस्थामूलक कार्य, मनरेगा आदि अन्य योजनाओं में भी अधोसंरचना विकास के कार्य किये गये है। योजना के समाप्ति उपरांत काफी समय व्यतीत हो चुका है। इसलिये पूर्व में कराये गये कार्यों के वर्तमान स्थिति के साथ-साथ वन ग्रामों के अधिवासियो के मूलभूत सुविधा का पुन: आंकलन किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।
पत्र में बताया गया है कि पूर्व में योजना के अंतर्गत संपन्न मुख्य अधोसंरचना कार्यों में सामाजिक कार्य के अंतर्गत आंगनबाड़ी, शौचालय, सामुदायिक भवन, रोड, पुलिया/रपटा आदि का निर्माण), जल संसाधन कार्य के अंतर्गत तालाब, नहर, स्टापडैम, हैण्ड पम्प, ट्यूब वैल, कुआ, एनीकट आदि का निर्माण तथा ऊर्जा के अंतर्गत सौर ऊर्जा-संयत्र, बायोगैस, एलपीजी आदि शामिल थे। इन कार्यों से लाभान्वित परिवारों में संख्या, कार्यों की वर्तमान स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता होने पर अनुमानित मरम्मत राशि का आंकलन कर प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें, जिससे सफल एवं उपयोगी कार्यों के प्रलेखीकरण के साथ-साथ मरम्मत हेतु आवश्यक राशि का व्यवस्था बावत प्रयास किया जावेगा।
इसी प्रकार, समग्र वन ग्राम विकास योजना के समाप्ति के उपरांत अभी तक लघु वनोपज संघ से अधोसंरचना विकास मद, कैम्पा में आस्थामूलक मद, पंचायत, मनरेगा, वन विभाग तथा अन्य विभाग/मदों से अगर कोई कार्य वन ग्रामों में कराये गये हैं, तो उसका विवरण भी प्रस्तुत किया जाये। पत्र में कहा गया है कि आज की स्थिति में वन ग्रामों में मूलभूत विकास हेतु अगर कोई कार्यों की आवश्यकता है तो पूर्ण औचित्य के साथ अनुमानित लागत दर्शाते हुये प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाये।
उल्लेखनीय है कि वन ग्रामों में कोई ग्राम पंचायत नहीं होती है तथा इनमें रहने वालों लोगों के मतदाता परिचय पत्र एवं आधार कार्ड तो बनते हैं परन्तु इन्हें मतदान करने समीपस्थ राजस्व भूमि में स्थित ग्राम पंचायतों में जाना होता है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि बारह साल पहले वन ग्रामों पर अधोसंरचना विकास के कार्य स्वीकृति किये गये थे तथा इतने दिनों में इन विकास कार्यों की क्या स्थिति है, इसकी जानकारी मंगाई गई है। यदि कोई संरचना टूट-फूट गई है तो उसके लिये फिर से वित्तीय संसाधन जुटाये जायेंगे।