अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बुधवार को फिर बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के हेडक्वार्टर, मिलिट्री एयरबेस और हेलीकॉप्टरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए है।

वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान ने क्षेत्रीय देशों की तरफ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, सभी हमले फेल हो गए। कुवैत पर दागी गई दो मिसाइलें या तो टारगेट से चूक गईं या रास्ते में ही नष्ट कर दी गईं। बहरीन पर दागी गई 3 मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया।

दूसरी ओर, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के केश्म आईलैंड स्थित एक कम्युनिकेशन्स टावर पर अटैक किया। अमेरिकी सेना ने इसे आत्मरक्षा में किया हमला बताया है। अमेरिका ने होर्मुज के पास एक ऑयल टैंकर पर भी हमला किया है। कमांड ने इसका एक ड्रोन वीडियो भी जारी किया।  बोत्सवाना के झंडे वाले इस ऑयल टैंकर से आग की लपटें निकलती दिखाई दीं। अमेरिकी नाकेबंदी के हमले का शिकार हुआ यह टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से ईरान के खार्ग आइलैंड की तरफ जा रहा था।

तेल की कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में 1% से ज्यादा तेजी आई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.05 डॉलर यानी 1.09% बढ़कर 97.05 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी हळक क्रूड 1.01 डॉलर यानी 1.08% चढ़कर 94.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

UN की संस्था पर सवाल उठे

दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना के आगे बढ़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन व यूएनएफआईएल की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पिछले हफ्ते इजराइली सैनिक लेबनान के अंदर पहले से ज्यादा आगे तक पहुंच गए। इसके बाद कई लोगों ने पूछा कि अगर यूएनएफआईएल का काम शांति बनाए रखना है, तो वह इजराइली सेना को आगे बढ़ने से क्यों नहीं रोक सका। बता दें कि यूएनएफआईएल संयुक्त राष्ट्र का एक शांति मिशन है, जिसे दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम की निगरानी और शांति बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है।