मध्य प्रदेश की सियासत अब बहते पानी की तरह नज़र आने लगी है क्योंकि नेता कब किस तरफ़ दिशा बदल ले, ये बता पाना अच्छे से अच्छे पंडित के लिए भी मुश्किल है.
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कहते है राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी कभी परमानेंट नहीं होती हैं. ख़ासकर चुनावी मौसम में तो पुराने से पुराना दुश्मन भी कब दोस्त बन जाए पता ही नहीं चलता.
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अब आप कटनी की निर्दलीय मेयर प्रीति सूरी को ही देख लीजिये. 6 महीने पहले नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और बीजेपी उम्मीदवार ज्योति दीक्षित को 5 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर जीत हासिल की थी.

ये जीत का ही परिणाम था कि 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित प्रीति सूरी को 6 महीनें बाद ही मिशन-2023 से पहले पार्टी में शामिल कर बीजेपी ने बड़ा दाव खेलते हुए वोट बैंक को मजबूत कर डैमेज कंट्रोल किया.

कटनी नगर निगम कई सालों से बीजेपी के कब्जे में थी लेकिन प्रीति सूरी की जीत से पार्टी को बड़ा झटका लगा था. अपने गढ़ को बचाने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक मैदान में उतरे लेकिन इन सब के बावजूद भी बीजेपी उम्मीदवार ज्योति दीक्षित को हार का सामना करना पड़ा था.
एमपी विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ 10 महीने ही बाकी हैं. बीजेपी सत्ता वापसी के लिए एक्शन मोड में नजर आ रही हैं. शायद इसीलिए कटनी महापौर प्रीति सूरी एवं तीन निर्दलीय पार्षदों और निवाड़ी जिला पंचायत सदस्य अमित राय को भोपाल बीजेपी दफ्तर में सीएम शिवराज सिंह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई. इस दौरान प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, बीजेपी विधायक संजय पाठक मौजूद रहे.