पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्यपाल के अभिभाषण का मुखर विरोध किया तो कमलनाथ ने उनका साथ नहीं किया| जीतू पटवारी कमलनाथ के रुख से असहज हैं| पहले तो पटवारी ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार करने को जायज़ ठहराने की कोशिश की लेकिन बाद में हताशा में कहा कि कमलनाथ बहुत अनुभवी हैं अब वे जैसा चाहेंगे वैसा मैं करूँगा| 

बीजेपी पटवारी और कमलनाथ के इस संघर्ष से खुश नज़र आ रही है| जीतू पटवारी MP कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष होने के साथ साथ युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं, लेकिन पटवारी किसी राजनितिक परिवार के वारिस नहीं हैं| बीजेपी कह रही है कि कांग्रेस में दो पीढ़ी टकरा रही है| 

MP कांग्रेस की उठापटक का असर चुनावों में भी साफ़ दिखाई दिया| जहाँ चुनावों में शिवराज कि खासी पूछ हुयी, वहीँ विपक्षी दल कॉंग्रेस के दो बड़े नाम अपने अपने घरों में सिमटे रहे। 9 बार सांसद,कई दफा केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री बने  कमलनाथ को कांग्रेस ने कोई जिम्मेदारी नहीं दी यहां तक कि चुनाव प्रचार तक में नहीं बुलाया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को भी साइडलाइन रखा गया। दिग्गी उत्तराखंड के अलावा कही नही दिखे। हलाकि इससे दो पीढ़ी के द्वंद से समाधान होता नहीं दिखता| पटवारी जैसे नेता अलग थलग दिखाई दे रहे हैं| इससे पहले पार्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस स्थिति में डालकर ये नेता और सत्ता गँवा चुकी है|