भोपाल. कलियासोत ब्रिज की रिटेनिंग वॉल और सड़क धंसने का मामला अब और तूल पकड़ रहा है. इस मामले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम यानि MPRDC के इंजीनियर, एमडी और चीफ इंजीनियर पर भी गाज गिर सकती है. अब इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) करेगा। EOW ब्रिज बनाने वाले MPRDC को नोटिस जारी करने की तैयारी में लग गया है। कांग्रेस ने भी कलियासोत ब्रिज की सड़क धंसने के मामले में MPRDC के सभी इंजीनियरों, एमडी और चीफ इंजीनियर को कठघरे में खड़ा किया है।
EOW के इंजीनियर मौके पर जाकर भी काम की क्वालिटी परखेंगे. वे ये देखेंगे कि क्या एग्रीमेंट की शर्तों के अनुरूप ही ब्रिज की अप्रोच रोड और रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया गया था? डिजाइन बनाते वक्त इंजीनियरों ने इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखा कि पानी के बहाव में रिटेनिंग वॉल बहने से पूरी सड़क धंस सकती है? MPRDC के अफसरों से यह भी पूछा जाएगा कि यदि इसकी डिजाइन गलत थी तो इंजीनियरों ने तब आपत्ति क्यों नहीं ली? डिजाइन गलत थी तो आगे का काम क्यों नहीं रोका गया? कंपनी को बिना देखे भुगतान क्यों किया? गलत डिजाइन के लिए कौन अफसर जिम्मेदार है? इसी CDS कंपनी की पहले भी सिंगारचोली ब्रिज में खासी खामियां मिली थीं, इस बात की अनदेखी क्यों की गई? EOW के अधिकारियों ने ये भी साफ कर दिया है कि पुल की दीवार धंसने में प्रथम दृष्टया आर्थिक अनियमितता के अलावा आपराधिक लापरवाही का मामला भी बनता दिख रहा है। इस मामले में आगे की कार्रवाई कानूनी सलाह लेकर तय की जाएगी।
इस बीच CDS इंडिया के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर केएस धामी ने कहा है कि डिजाइन में कोई गलती नहीं थी। भदभदा डैम के 13 गेट एक साथ खोले जाने से पानी का बहाव ज्यादा हो गया। यह पानी हाईवे की नींव में चला गया और मिट्टी नम हो गई। इसी कारण से रिटेनिंग वॉल बह गई और सड़क धंस गई।
उधर, कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने सड़क धंसने के मामले में इंजीनियरों पर सवाल उठाए. उन्होंने इसे जानलेवा लापरवाही करार दिया. मिश्रा ने पुल के निर्माण के वक्त MPRDC के सभी इंजीनियर, एमडी और चीफ इंजीनियर की भूमिका को सार्वजनिक करने की भी मांग की.