उत्तरप्रदेश के कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने के दौरान मां-बेटी की जिंदा जल कर मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब पुलिस-प्रशासन सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने पहुँची। इसी दौरान एक झोपड़ी में आग लगने से महिला और उसकी बेटी की अफसरों के सामने जिंदा जलकर मौत हो गई। मामले में एसडीएम-एसएचओ समेत 40 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

पीड़ित परिवार का आरोप यह है कि कब्जे को ध्वस्त करने के चलते प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर कृष्ण गोपाल दीक्षित के परिवार को झोपड़ी में जबरन कैद कर उस पर आग लगा दिया। इसके चलते झोपड़ी के अंदर फंसी मां-बेटी की झुलस कर मौत हो गई। 

वहीं प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए टीम पहुंची थी। जिस घर को गिराया जा रहा था वो लोग खुद को आग लगाने की धमकी दे रहे थे। तभी प्रदर्शन के दौरान ही अचानक वहां पर आग लग गई, जिसमें मां-बेटी की जिंदा जलकर मौत हो गई। 

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी इस घटना पर योगी सरकार  पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है -

घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने इसके बाद कानपुर देहात के मंडोली गांव में पुलिस और प्रशासन पर हमला कर दिया।  घटना की जानकारी मिलते ही बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं। तनाव और आक्रोश को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कानपुर देहात पुलिस ने 11 नामजद लोगों के साथ-साथ एक कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। इस मुकदमे में कानपुर देहात के मैथा तहसील के एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद, थाना प्रभारी दिनेश गौतम और लेखपाल अशोक सिंह को मुख्य आरोपी बनाकर 307, 302 जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है।