यह तथ्य तब सामने आया जब आरटीआई कार्यकर्ता और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने अधिनियम के तहत सवाल किए। गोखले के सवालों का जवाब देते हुए एसडीओ (राजस्व) खरगोन ने जवाब दिया कि भू राजस्व अधिनियम 1959 के तहत घरों और दुकानों को तोड़ा गया था।
जवाब में कहा गया है कि 'कलेक्टर कार्यालय खरगोन ने 11 अप्रैल को कोई आदेश जारी नहीं किया', गोखले ने उस आदेश की प्रति मांगी थी जिसके तहत दंगों के एक दिन बाद 11 अप्रैल को घरों और दुकानों को ज़मीदोज़ गया था।
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लोक सूचना अधिकारी, एसडीओ (राजस्व), खरगोन का कहना है कि अतिक्रमण को एमपी भू-राजस्व संहिता 1959 (MP Bhu-Rajaswa Sanhita 1959 and under section 248 of the amended Act 2018) के तहत हटाया गया था।
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा की है और कहा है कि वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे क्योंकि सभी कार्रवाई कानूनों के खिलाफ की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील एहतेशाम हाशमी ने कहा कि अगर जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है तो पूरी कार्रवाई को 'दंगाइयों' के खिलाफ कार्रवाई क्यों करार दिया गया।
“अवैध अतिक्रमण के मामलों में भी, प्रशासन पहले नोटिस जारी करता है और फिर कार्रवाई करता है। सरकार ने कार्रवाई को दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में प्रचारित किया है। यह गृह मंत्री और अन्य भाजपा नेताओं के बयान से स्पष्ट था, ”एससी वकील हाशमी ने कहा।
उन्होंने कहा कि वह इस मामले में कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
Bizarre twist to Khargone demolition incident:
— Saket Gokhale (@SaketGokhale) April 19, 2022
District Magistrate Khargone tells me that no demolition orders were issued by her office.
DM also claims only "unauthorized encroachments" were demolished which is not true.
Who issued the orders then? Only DM has the authority. pic.twitter.com/9fH782SjmA
The response also says that Muslim homes in Khargone were demolished under the Land Revenue Act, 1959.
— Saket Gokhale (@SaketGokhale) April 19, 2022
The DM is the officer responsible for land revenue matters.
If DM didn't issue the order, who did?
IMPORTANT:
If anyone knows any legal homes that were demolished, pls DM.
इधर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को कहा कि पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान कर ली है जिसने खरगोन के एसपी सिद्धार्थ चौधरी को 10 अप्रैल को रामनवमी पर सांप्रदायिक झड़पों में गोली मारकर घायल कर दिया था, और उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
घटना के बाद चौधरी को अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
मिश्रा ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पथराव करने वालों की वीडियो फुटेज के जरिए पहचान की जा रही है।
मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, "खरगोन के एसपी (सिद्धार्थ चौधरी) को गोली मारने वाले व्यक्ति की पहचान वसीम उर्फ मोहसिन के रूप में हुई है और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के सिलसिले में अब तक 154 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि हिंसा में कथित संलिप्तता के लिए नवाज और मोहसिन के खिलाफ कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि मोहसिन के खिलाफ 10 से अधिक और नवाज के खिलाफ आठ से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया था कि नवाज खरगोन शहर के तालाब चौक इलाके के रहने वाला है और मोहसिन उर्फ नाटी जकारिया मस्जिद इलाके के रहने वाला है
पिछले 11 दिनों में पहली बार मध्य प्रदेश के दंगा प्रभावित खरगोन शहर में कर्फ्यू में बुधवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच एक बार में छह घंटे की ढील दी गई।
#Khargone का कोई भी गुनहगार कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।
— Dr Narottam Mishra (@drnarottammisra) April 20, 2022
वीडियो फुटेज की मदद से अबतक 154 लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। 1/2 pic.twitter.com/ZVSwzuckWc
समाज के दुश्मनों का कोई धर्म नहीं होता। ऐसे लोग दंगाई होते हैं और दंगाइयों के साथ जैसी सख्ती की जानी चाहिए वैसी ही की जा रही है। pic.twitter.com/5cysBvwpdX
— Dr Narottam Mishra (@drnarottammisra) April 20, 2022