उज्जैन. महज तीन दिन बाद महाकाल की भक्ति का सावन माह शुरु हो जाएगा. इसके लिए महाकाल मंदिर में इस बार खास तैयारी की जा रही है. हर साल सावन-भादौ मास में भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है। दो साल से कोरोना के कारण कई प्रतिबंधों के साथ यात्राएं निकाली गईं लेकिन इस साल सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं. इस वर्ष कुल छह सवारियां निकाली जाएंगी। साथ ही इस बार परंपरागत मार्ग से ही बाबा की पालकी निकाले जाने की बात कही जा रही है।

सावन-भादौ मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों में इस बार छह सवारियां रहेंगी। कोरोना के कारण पिछले दो वर्षों से बदले हुए मार्ग से सवारी निकाली जा रही थी, लेकिन इस वर्ष परंपरागत मार्ग से सवारी निकाली जा रहीं हैं। भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया कि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सवारी की तैयारियों में जुटा हुआ है।

इन मार्गों से निकलेगी पालकी
बाबा महाकाल की पहली सवारी 18 जुलाई को निकलेगी। सवारी महाकाल मंदिर से आरंभ होकर गुदरी, कहारवाड़ी, हरसिद्धि पाल, रामानुजकोट, रामघाट पहुंचेगी. यहां क्षिप्रा के जल से जलाभिषेक, आरती-पूजन होगा। इसके बाद महाकाल सवारी पुन: आगे के लिए रवाना होगी। कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी होते हुए पुन: महाकाल मंदिर पहुंचेगी।

कब-कब निकलेंगी महाकाल सवारियां
पहली सवारी 18 जुलाई, दूसरी सवारी 25 जुलाई, तीसरी सवारी 1 अगस्त, चौथी सवारी 8 अगस्त, पांचवी सवारी 15 अगस्त, छठी व अंतिम शाही सवारी 22 अगस्त को निकाली जाएगी।