भोपाल: सरकारी परियोजनाओं में वन भूमि लेने पर अन्य राजस्व भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण करने के लिये अब तक आठ जिलों ने अपना लैंड बैंक घोषित कर दिया है। वन विभाग के सचिव अतुल मिश्रा ने मुख्य सचिव के निर्देश पर अन्य जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर कहा है कि वे भी अपने जिले में ऐसा ही लैंड बैंक घोषित करें।
अब तक आठ जिलों में कुल 1687.036 हैक्टेयर क्षेत्र में लैंड बैंक बनाया गया है जिसमें से 1258.476 हैक्टेयर क्षेत्र क्षतिपूरक वनीकरण करने के लिये उपयुक्त है।
इन जिलों में बालाघाट जिले की तहसील बैहर के ग्राम लमोती, कंडई, पथारी एवं बिरसा तहसील के ग्राम सोनगुड्डा, धार जिले की मनवार तहसील में ग्राम करोंदिया मोटा, कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम डूंडी व तहसील बड़वारा के ग्राम बड़वाराकला, रीठी तहसील के ग्राम हरद्वारा व स्लीमनाबाद तहसील के ग्राम धानवाही, नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील के ग्राम मोरेघाट, उज्जैन जिले की तहसील माकडोन के ग्राम ओरंगपुर एवं ग्राम तुमनी, सिवनी जिले की तहसील केवलारी के ग्राम कनारी, तहसील सिवनी के ग्राम टोलापिपरिया एवं ग्राम पटरा, नरसिंहपुर जिले की तहसील तेंदूखेड़ा के ग्राम ढिलवार तथा सिंगरौली जिले की तहसील चितरंगी के ग्राम जमतिहावा, तहसील सरई के ग्राम घिरोली, ग्राम पिदारा व ग्राम बंजारी में राजस्व भूमि पर लैंड बैंक बनाया गया है तथा इसे वन विभाग की वेबसाइट पर डाल दिया गया है।
वन विभाग के सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि यदि किसी जिले में लैंड बैंक चिन्हित नहीं है तो वह जिला अन्य जिले में उपलब्ध लैंड बैंक की भूमि को क्षतिपूरक वनीकरण के लिये आरक्षित कर सकता है।