भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिल की बात जुबां पर आ गई. चौहान ने वन्य प्राणी सलाहकार बोर्ड की बैठक में वरिष्ठ अफसरों की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि पालपुर कूनो में लायन ( एशियन लायन) तो आए नहीं, चीता ही ले आओ. मुख्यमंत्री चौहान ने वन मंत्री डॉ विजय शाह को निर्देशित किया है कि वे सांसद, विधायकों और स्थानीय नेताओं से बातचीत कर उन्हें रातापानी टाइगर रिजर्व बनाने के लिए राजी करें.

 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन में राज्य वन्य प्राणी सलाहकार बोर्ड की बैठक हुई. बैठक में एक दर्जन से अधिक मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक में फॉरेस्ट अफसरों ने पिछली बैठक में उठाए गए मुद्दों पर एक्शन-टेकन रिपोर्ट सबमिट की. साथ ही मुख्य वन प्राणी अभिरक्षक डॉ जेएस चौहान ने शाखा द्वारा किए गए विकास कार्यों को भी गिनाया. जब पालपुर कूनो का जिक्र आया तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का दर्द झलक आया. मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पालपुर कूनो में हम लायन तो नहीं ला सके, चीता तो ले आओ. यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि दक्षिण अफ्रीका से चीता लाने के मसले पर भी अभी संशय की स्थिति बनी हुई है.

नक्सलियों को प्रदेश में नहीं रहने देंगे :

इस मुद्दे के अलावा बोर्ड के सदस्य अभिलाष खांडेकर और डॉ एचएस पावला ने कान्हा में नक्सलाइट और हाथियों से हुई मौत के मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया. बोर्ड के सदस्य खांडेकर और डॉ पावला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ध्यान आकृष्ट कराया कि कान्हा का 80% एरिया में नक्सलियों का मूवमेंट है. इस पर  मुख्यमंत्री चौहान ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि नक्सलियों को कान्हा में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में नहीं रहने देंगे.

मुख्यमंत्री चौहान ने यह भी कहा कि नक्सलियों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए रणनीति बनाई गई है जिसे हम उजागर नहीं कर सकते. इस पर डॉ पावल ने मुख्यमंत्री को सलाह दी है कि नक्सलियों के विरुद्ध सुरक्षा एजेंसी के ऑपरेशन और अधोसंरचना के कार्य से फॉरेस्ट के कर्मचारियों को मुक्त रखा जाए. पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नागेंद्र सिंह ने शहडोल में हाथियों के उत्पात की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया. मुद्दे पर खांडेकर ने भी अपनी बात रखी और कहा कि हाथियों पर एक विशेषज्ञों की कमेटी बनी थी. बेटी ने अपनी रिपोर्ट जनवरी 22 में सबमिट कर दी है. उस पर क्रियान्वयन करने की जरूरत है. मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विशेषज्ञों एवं एनजीओ के माध्यम से हाथियों के लिए मिलकर कार्य करें.

रातापानी टाइगर रिजर्व के लिए ना-नुकुर :

बैठक में रातापानी सेंचुरी को टाइगर रिजर्व बनाने का मुद्दा उठा. इस मसले पर मुख्यमंत्री चौहान ना-नुकुर करते नजर आए. चौहान ने कहा कि स्थानीय लोगों का विरोध हो रहा है. इस पर बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि रातापानी टाइगर रिजर्व बनता है तो बाघों का मूवमेंट भोपाल शहर के इलाकों में नहीं हो पाएगा. टाइगर को बाहर निकलने से रोकने के लिए नेशनल पार्क में बेहतर मैनेजमेंट किया जा सकेगा. इसके लिए फंड भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध हो सकेंगे. बोर्ड के सदस्यों की रूचि को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विजय शाह को यह जिम्मेदारी दी है कि वे सांसद, विधायक और स्थानीय लोगों से बातचीत कर टाइगर रिजर्व बनाने के लिए राजी करें.

टाइगर मूवमेंट एरिया में निर्माण रोके :

बैठक में वन्य प्राणी विशेषज्ञ खांडेकर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया है कि भोपाल मास्टर प्लान अभी बना नहीं है. मास्टर प्लान में यह विशेष रूप से प्रावधान किया जाए कि बाघ मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण कार्य ना हो. उन्होंने कहा कि बाघ मोमेंट क्षेत्र में बिना रोक-टोक निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं. कंक्रीट के जंगल के कारण पर्यावरण का इको सिस्टम बिगड़ेगा. टाइगर और मानव के बीच हमेशा संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी.