भोपाल। राज्य सरकार नक्सल प्रभावित तीन जिलों में एक 'नयी सेना का गठन करने जा रही है। इसका उदेश्य नक्सलियों के सफाए में पुलिस की मदद करना होगा। यह सामुदायिक पुलिसिंग के तहत प्रयोग कहा जा रहा है। दूसरी ओर राज्य के नौकरशाहों की सेना को परिणामोन्मुखी बनाने के लिये भी उन्हें ज्यादा जवाबदेह बनाने की कवायद आने वाले समय में औरतेज हो सकती है, ज्ञात हो कि कल ही सीएम शिवराज ने मैदानी अफसरों को कहा है कि यदि वे उनके हिसाब से नही चलेंगे तो तत्काल बदल दिये जायेंगे।

इधर सामुदायिक पुलिसिंग के तहत 'सेना' के गठन में इसमें आदिवासी युवाओं को भी जगह मिलेगी। पहले चरण में डेढ सौ युवाओं को पांच वर्ष के लिये नियुक्त किया जाएगा तथा इन्हें 25 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन भी मिलेगा।

इस मामले में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है जो कैबिनेट की मंजूरी के लिये भेजा जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 भर्तियां होंगी। गृह मंत्री का कहना है कि यह बड़ा और गंभीर विषय है, नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से यहां आए दिन बड़ी घटनाएं होती रहती है। इसीलिये विशेष सहयोगी दस्ता तैयार किया जायेगा और बेहतर पुलिसिंग सेवा के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर अपनी पकड़ मजबूत की जाएगी।

हर सप्ताह अफसरों को देना होगा हिसाब

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अफसरों को सरकार के हिसाब से काम करने की चेतावनी के बाद अब तय किया गया है कि हर अफसर को अपने कामकाज की सप्ताह और मासिक तौर पर ब्योरा सरकार को देना होगा, इसे सीएम पोर्टल पर दर्ज किया जायेगा। सरकार के प्रवक्ता व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो बात कही है, उसका आशय यह है कि बीते करीब तीन साल ककहरा' की चपेट में थे, यानि पंद्रह महीने कमलनाथ की सरकार के चलते विकास अवरूध्द रहा और फिर बाकी का समय कोरोना की लहरों के चलते काम बाधित हुए, यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने समयबध्द सरकारी कामकाज पर जोर दिया है।