भोपाल: राज्य सरकार अपने 55 साल पुराने मप्र जेल मेनुअल 1968 में बदलाव कर नया मेनुअल जारी करेगी। राज्य के जेल विभाग ने यह नया मेनुअल बना दिया है तथा इसे शासन स्तर पर भेजा गया है। केबिनेट की मंजूरी के बाद यह लागू कर दिया जायेगा।
दरअसल केंद्र सरकार ने मॉडल जेल मेनुअल 2016 बनाया है तथा सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वे इसके अनुसार अपना जेल मेनुअल अपडेट करें। अभी तक 11 राज्य जिनमें केंद्र शासित प्रदेश भी हैं, अपना जेल मेनअल अपडेट कर चुके हैं। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पत्र लिखकर मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी माडल जेल मेनुअल 2016 के अनुसार अपना नया मेनुअल बनाने के लिये कहा है। दरअसल जेल विषय न ही केंद्र की सूची में है न ही समवर्ती सूची में है बल्कि यह पूर्णतया राज्य का विषय है। इसलिये केंद्र ने माडल जेल मेनुल बनाकर राज्यों से इसे लागू करने का आग्रह किया है।
यह होगा बदलाव:
मप्र में जेलों की चार दीवारी 5 मीटर से छह मीटर ऊंची की जायेगी। मोबाईल आदि इलेक्ट्रिानिक गेजेट्स भी बंदियें द्वारा जेल के अंदर ले जाना प्रतिबंधित किये जायेंगे और नये आ गये मादक पदार्थों को भी ले जाया जाना पतिबंधित किया जायेगा जिनका वर्तमान जेल मेनुअल में प्रावधान नहीं है।
मॉडल जेल मैनुअल में कैदियों के पुनर्वास, महिला कैदियों के लिए अलग जेल और खुली जेल समेत अनेक बिंदुओं को समाहित किया गया है। कैदियों को समाज में पुनस्र्थापित करने, जेल के अधिकारियों के बीच अनुशासन का भी इसमें प्रावधान किया गया है।
सभी जेलों को अत्याधुनिक बनाने का भी उपबंध किया गया है। मप्र में कई जेले ऐसी हैं जिनको बने दो सौ साल हो चुके हैं। नये माडल मेनुअल में कैदियों के लिए लाइब्रेरी बनाने,उन्हे अनेक प्रकार की शिक्षा से युक्त करने, उनके स्वास्थ्य की व्यवस्था करने, जेल में ही अच्छा अस्पताल और मानसिक विकास के लिए अनेक प्रकार के कार्यक्रम शुरू करने का भी प्रावधान किया गया है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिये जेल के स्टाफ को हर 2 साल में एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने, बंदियों से जुड़े काम कर रहे एनजीओ की पृष्ठभूमि समय-समय पर जांचने, उन कैदियों को रिहा नहीं किया जाये जिन्हें राज्य या व्यक्तियों की सुरक्षा के लिये खतरा माना जाता है, का भी प्रावधान किया गया है।