मध्यप्रदेश में इस वर्ष नौतपा का दौर बेहद चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है। 25 मई से शुरू हो रहे नौतपा के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्यप्रदेश के अनेक जिलों में हीटवेव और कुछ स्थानों पर गंभीर हीटवेव की चेतावनी जारी की है। खासकर ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और पूर्वी मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी लोगों को बेहाल कर सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, सतना, रीवा और मऊगंज जैसे जिलों में नौतपा के शुरुआती दिनों में लू का प्रभाव सबसे अधिक रहने की संभावना है। कई क्षेत्रों में दिनभर गर्म और शुष्क हवाएं चलेंगी तथा दोपहर के समय बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कुछ जिलों में रात का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने के संकेत हैं, जिससे लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। 

हालांकि इस बार नौतपा पूरी तरह शुष्क नहीं रहने वाला। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और दक्षिण बिहार से आंध्रप्रदेश तक बनी द्रोणिका के प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में मौसम समय-समय पर करवट ले सकता है। जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी और शहडोल संभाग में दोपहर बाद बादल बनने, धूलभरी आंधी चलने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। 

भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी नौतपा के दौरान मौसम मिश्रित रह सकता है। दिन में तेज धूप और तपिश बनी रहेगी, लेकिन शाम के समय अचानक तेज हवाएं, बादल और हल्की बारिश लोगों को अस्थायी राहत दे सकती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नौतपा के दूसरे हिस्से में प्री-मानसूनी गतिविधियां कुछ बढ़ सकती हैं, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट संभव है। 

इस बार की विशेष बात यह है कि नौतपा के दौरान ही दक्षिण-पश्चिम मानसून भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर अनुकूल परिस्थितियां बनने से वातावरण में नमी बढ़ रही है। यही कारण है कि भीषण गर्मी के बीच भी प्रदेश में स्थानीय स्तर पर आंधी और बूंदाबांदी की स्थितियां बन रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा की तीव्र गर्मी मानसून के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। तेज गर्मी के कारण धरती और समुद्र के तापमान में अंतर बढ़ता है, जिससे मानसूनी हवाओं को उत्तर भारत की ओर बढ़ने में मदद मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह कहावत कही जाती है — “जितना तपेगा नौतपा, उतना बरसेगा पानी।”

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान लापरवाही भारी पड़ सकती है। लगातार बढ़ती गर्मी, तेज धूप और उमस के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकावट के मामलों में वृद्धि हो सकती है। लोगों को दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है।

कुल मिलाकर इस बार मध्यप्रदेश का नौतपा केवल “आग उगलती गर्मी” तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आंधी, बादल, उमस और मानसून की शुरुआती आहट भी देखने को मिलेगी। यानी आने वाले नौ दिन प्रदेश में मौसम के कई रंग दिखाने वाले हैं।