उज्जैन का महाकाल लोक देश और दुनिया के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है ....11 अक्टूबर 2022 के दिन देश के प्रधानमंत्री ने इसका लोकार्पण कर दुनिया भर में इसकी ब्रांडिंग की ,उस दिन से रोज यहां अनवरत आस्था का कुंभ जुटता रहा है ... यही नहीं उज्जैन में उद्योग धंधे और रोजगार का साधन भी यह महाकाल लोक ही बन गया है....

लेकिन जब यह महाकाल लोक बन रहा था तब मूर्तियों की स्थापना को लेकर इन पंक्तियों के लेखक ने यह मुद्दा  उठाया था कि फायबर की प्रतिमाएं हिंदू धर्म स्थानों पर नहीं लगती, यह बच्चों के खिलौने नहीं है ...यहां पर धातु की प्रतिमा या पाषाण की मूर्तियां ही लगाई जाना चाहिए थी।

बावजूद इसके सरकारी तंत्र ने मूर्तियों के नाम पर 194 करोड़ रूपए का खर्च बताकर  भ्रष्टाचार की मुहर लगा दी थी। मात्र 7 महीने में ही आज बारिश के पहले चली  हवा और आंधी ने महाकाल लोक में किए गए सरकारी पाप की पोल खोल कर रख दी.... जिन रहनुमाओं को महाकाल लोक के निर्माण का जिम्मा दिया गया था, वे भक्तों और भगवान दोनों को छल कर अन्यत्र चले गए....

आज 28 मई रविवार के दिन केवल प्रतिमाएं टूटकर खंडित ही नहीं हुई है, इससे भक्तों का विश्वास भी डगमगा गया हैं ....अभी तक तो भ्रष्टाचार की जद में मानव शरीर और भौतिक निर्माण कार्य ही आते थे लेकिन अब तो परमपिता परमेश्वर को भी इन भ्रष्टाचारियों ने अपने आगोश में ले लिया...।

विपक्ष चाहे कोई मुद्दा बनाएं, मीडिया जान कर भी इस सच्चाई को अनदेखा करें, लेकिन भगवान महाकाल उन पापियों को कतई क्षमा न करें जिन्होंने महाकाल लोक के घटिया निर्माण के नाम पर भक्त और भगवान दोनों को छला हैं...!