Maharashtra Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे को यह कहते हुए राहत देने से इनकार कर दिया कि उन्होंने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया है. महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर उद्धव ठाकरे इस्तीफा नहीं देते तो उन्हें कोर्ट से राहत मिल सकती थी.

पांच जजों की बेंच ने सुनाया ये फैसला-

कुछ समय पहले ही CJI की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने कहा कि राज्य में शिंदे सरकार बनी रहेगी. कोर्ट ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे इस्तीफा नहीं देते तो हम राहत दे सकते थे. करीब 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले में कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला स्पीकर को लेना चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को सौंपने का फैसला किया है. 

उद्धव ठाकरे ने कहीं ये बात-

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि इस देश में लोकतंत्र की रक्षा करना हमारा काम है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मैंने इस्तीफा नहीं दिया होता तो शायद मैं दोबारा मुख्यमंत्री बन सकता था. मैं अपने लिए नहीं लड़ रहा हूं, मेरी लड़ाई लोगों के लिए है, देश के लिए है. राजनीति में मतभेद हैं लेकिन हमारी एक राय है कि यह देश को बचाने के लिए है. उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि अगर इस मुख्यमंत्री (शिंदे) और उपमुख्यमंत्री (देवेंद्र फडणवीस) में नैतिकता है तो उन्हें मेरी तरह इस्तीफा दे देना चाहिए.

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संजय राउत का बयान भी आया सामने-

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्पीकर को राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त व्हिप को ही मान्यता देनी चाहिए. वहीं, सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना है कि गोगावले (शिंदे गुट) को शिवसेना पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अवैध था. उस पर उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिंदे समूह का व्हिप अवैध है, इसका मतलब है कि उनका व्हिप अवैध और हमारे व्हिप द्वारा दिया गया आदेश कानूनी है, इसलिए सभी (शिंदे समूह) को उस व्हिप के अनुसार सदस्यता मिलनी चाहिए.

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क्या था पूरा मामला?

2022 में महाराष्ट्र में शिंदे गुट के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई. सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के टूटने और महाराष्ट्र में सरकार बदलने की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया. 

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, कृष्ण मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने आज फैसला सुनाया. उल्लेखनीय है कि उद्धव गुट ने शिंदे के तख्तापलट और उनकी सरकार के गठन को अवैध करार दिया था. 

इस राजनीतिक उठापटक के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक कई याचिकाएं दायर की गई. सदस्यता रद्द करने के आदेश के खिलाफ शिंदे गुट के 16 विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जबकि शिंदे को मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करने के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ उप-सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर बनाई सरकार 

एकनाथ शिंदे शिवसेना के 16 विधायकों के साथ पहले पिछले साल जून में सूरत गए थे और बाद में गुवाहाटी में रुके थे. उद्धव ने शिंदे को वापस आकर बैठकर बात करने का प्रस्ताव भी दिया था. हालांकि शिंदे ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में नई सरकार बना ली. 

फिर राज्यपाल ने शिंदे-भाजपा गठबंधन सरकार को मान्यता देते हुए शपथ दिलाई. ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे और उनके 15 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो इसे संविधान पीठ को ट्रांसफर कर दिया गया. इस बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हेमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल हैं.