भोपाल: कान्हा टाइगर रिजर्व के प्रसिद्ध नर बाघ, जिसे 'महावीर' नाम के टाइगर की मंगलवार को मौत। महावीर नामक टाइगर का कान्हा के किसली और मुक्की जोन में अक्सर दीदार होता रहा है। यह अपनी विशाल काया और शांत स्वभाव के लिए पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। कान्हा में एक के बाद एक बाघ मर रहे हैं और यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है। दो महीने के भीतर 7-8 बाघों की मौत हो चुकी है। कान्हा, बांधवगढ़, सतपुड़ा और पेंच टाइगर रिजर्व में हो रही टाइगरों की मौत से मुख्यालय से फील्ड में पदस्थ अफसरों के प्रबंधन पर सवाल उठने लगे है। वन प्राणियों का मानना है कि इस सम्बन्ध में राज्य सरकार को कड़े कदम यानि बड़े पैमाने पर उठाने पड़ेंगे। यानि प्रशासनिक सर्जरी करने की आवश्यकता है।
जनवरी से अब तक 32 बाघों की मौत
जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश में 32 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से सात की मौत शिकार से संबंधित घटनाओं के कारण हुई। जबकि बाकी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। पिछली बाघ जनगणना के अनुसार, राज्य में 785 बाघ हैं, जिनमें से 35% संरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं। शिकार से संबंधित सभी सात मौतें बिजली के झटके के कारण हुईं। इनमें से पांच बाघिनें 18 महीने से आठ साल की उम्र की थीं। ये मौतें पूर्वी मंडला, उत्तरी शाहडोल, पश्चिमी छिंदवाड़ा वन प्रभाग, उमरिया और दक्षिणी सिवनी वन क्षेत्र में हुईं।