अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर वार्ता के बीच अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स को निशाना बनाया। इसके अलावा बंदर अब्बास पोर्ट के पास सरफेस टू एयर मिसाइल साइट पर भी हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के मुताबिक यह कार्रवाई सेल्फ-डिफेंस यानी आत्मरक्षा में की गई। सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को खतरे से बचाने के लिए ये हमले किए गए।
अमेरिकी सेना का आरोप है कि बारूदी सुरंगें बिछाने से अंतरराष्ट्रीय जहाजों और अमेरिकी युद्धपोतों को खतरा हो सकता था। हालांकि, हॉकिन्स ने यह भी कहा कि सीजफायर के दौरान अमेरिका संयम बरत रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हमले से दोनों देशों की बातचीत में थोड़ी रुकावट जरूर पैदा कर सकती है, लेकिन फिलहाल शांति वार्ता रुकती नहीं दिख रही।
इधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते को लेकर बातचीत अभी भी जारी है। भारत दौरे पर जयपुर पहुंचे रूबियो ने पत्रकारों से कहा कि कतर में आज भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई और अब देखना होगा कि कितनी प्रगति होती है। उन्होंने कहा कि शुरूआती समझौते के दस्तावेज में इस्तेमाल होने वाले खास शब्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लगातार चर्चा चल रही है। इसी वजह से समझौते को अंतिम रूप देने में कुछ दिन और लग सकते हैं।
ईरान को दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता
पूर्व अमेरिकी डिप्लोमेट रॉबर्ट मैली का कहना है कि कितना भी दबाव डाल लिया जाए, लेकिन ईरान यूरेनियम एनरिच्डमेंट का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा। अल जजीरा से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान को लगता है कि परमाणु संवर्धन उसका अधिकार है और वह इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। मैली ने कहा कि ईरान दोबारा किसी धोखे का शिकार नहीं होना चाहता और उसके लिए अपनी इज्जत और राष्ट्रीय सम्मान भी बहुत अहम है।