भोपाल।प्रदेश की अनेक कृषि उपज मंडियां जानबूझकर अपने प्रांगण में किसानों से उनकी उपज की खरीद-फरोख्त नहीं कर रही हैं तथा किसानों को मंडी के बाहर सस्ते में फसल बेचने के लिये विवश किया जा रहा है। राज्य मंडी बोर्ड के आयुक्त विकास नरवाल ने इन अक्रियाशील मंडी प्रांगणों में तत्काल क्रय-विक्रय प्रारंभ करने के निर्देश सभी मंडी सचिवों को जारी किये हैं और अपने आंचलिक कार्यालयों के अधिकारियों से कहा है कि पालन प्रतिवेदन पन्द्रह दिनों के अंदर मुख्यालय को भेजा जाये।

मंडी आयुक्त ने अपने निर्देश में कहा है कि मंडी अधिनियम मंडी क्षेत्र में से किसी स्थान को अधिसूचित कृषि उपज के विपणन के लिये उपयोग में नहीं लाये जाने का प्रावधान है, परन्तु यह देखने में आया है कि कतिपय मंडी क्षेत्रों में कृषि उपज का पर्याप्त उत्पादन और अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के होने के बावजूद मंडी प्रांगणों और उपमंडी प्रांगणों में कृषि उपज का क्रय-विक्रय नहीं हो रहा है। किसानों/विक्रेताओं को कृषि उपज का प्रतियोगितात्मक विक्रय मूल्य, इलेक्ट्रॉनिक तौल और तुरंत भुगतान की सुविधा मंडी प्रांगण में प्राप्त होती है, जहां पर कृषि विपणन संबंधी गतिविधियां मंडी के नियंत्रण के अधीन संचालित होती हैं। मंडी समितियों में कृषि उपज विपणन के लिये व्यापारियों को अनुज्ञप्ति प्रदान की गई है, जिसके तहत उनके द्वारा संबंधित मूल मंडी प्रांगण एवं उपमंडी प्रांगण में व्यवसाय किया जा सकता है।

मंडी आयुक्त ने मंडी सचिवों को निर्देशित किया है कि उनके अधीनस्थ अक्रियाशील मंडी प्रागंणों में तत्काल प्रभाव से मंडी कर्मचारियों की डियूटी लगाई जाये। सभी कार्यालयीन दिवस में प्रात: 11 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक मंडी कर्मी और अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी/प्रतिनिधि मंडी प्रांगण अक्रियाशील होने पर भी वहां अनिवार्य रूप से उपस्थिति रहेंगे और प्रांगण में कृषि उपज की आवक होने पर उसका निर्धारित प्रक्रिया अनुसार विक्रय, तौल और भुगतान किया जायेगा। उपरोक्त व्यवस्था की मंडी स्तर से समस्त अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों को जानकारी प्रदाय कर पालन करायें। उक्त कार्य में अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों द्वारा सहयोग नहीं करने पर उनके विरूद्ध मंडी अधिनियम एवं उपविधि के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाये। मंडी क्षेत्र में स्थानीय कृषकों/विक्रेताओं को अक्रियाशील प्रांगणों में कृषि उपज के विक्रय, तौल और भुगतान की सुविधा उपलब्ध होने बाबत् जानकारी दी जाये। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसान संघों के माध्यम से भी किसानों को मंडी प्रांगण में कृषि उपज लाने हेतु प्रोत्साहित करें। मंडी क्षेत्र में सीधे/प्रतिष्ठानों पर खरीदी (सौदा पत्रक को छोडक़र) को प्रतिबंधित करने के लिये अभियान चलाया जाये।