Big Change in MBBS Course: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अंडरग्रेजुएट मेडिकल प्रोग्राम्स में क्वालिटी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन को लागू करने के लिए सर्कुलर जारी किया है। जिसमें छात्रों को पाठ्यक्रम की शुरुआत में महर्षि चरक की शपथ लेने की सलाह दी जाती है। यह भी कहा गया है कि एमबीबीएस के छात्रों को एक गांव गोद लेना होगा।

नए सर्कुलर के मुताबिक, जब मेडिकल की पढ़ाई शुरू होगी तो छात्रों को महर्षि चरक की शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही  एमबीबीएस के लिए नई योग्यता-आधारित चिकित्सा शिक्षा का लक्ष्य तीन क्षेत्र संज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोप्रेरक को शामिल करना है।

इस बीच, अगस्त 2019 में पेश किया गया नया पाठ्यक्रम मेडिकल छात्रों को एक मजबूत आधार और समग्र पहलुओं के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करेगा। इसमें परिवार गोद लेने के कार्यक्रम, योग, ध्यान और स्थानीय भाषा सीखने सहित नींव पाठ्यक्रम शामिल हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मेडिकल कॉलेजों को नए पाठ्यक्रम को लागू करने का निर्देश दिया गया है।

एमबीबीएस के छात्र गोद लेंगे गांव :

हाल ही में जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि एमबीबीएस छात्रों को गांव गोद लेना होगा। सर्कुलर के मुताबिक वहीं गांव गोद लिया जा सकता है जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। इस बीच, नए पाठ्यक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, FAIMA डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रोहन कृष्णन ने कहा कि पाठ्यक्रम की संरचना में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। पहले थर्ड ईयर में फील्ड ट्रेनिंग दी जा रही थी, वह अब फर्स्ट ईयर से ही शुरू होगी।