भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट 'संस्कृति वन' अब मप्र में भी आकार लेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हर साल होने वाले वन महोत्सव में एक 'संस्कृति वन' बनाने का सुझाव दिया है. पीएम मोदी के संकेत मिलते ही देश के चार वरिष्ठ अधिकारी गुजरात में बने संस्कृति वन का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट शासन को मंगलवार को सौंप दी है.

'गुजरात का 21 वां मारुति नंदन संस्कृति वन की तस्वीर'
अब फॉरेस्ट अफसरों के अध्ययन रिपोर्ट के पर राज्य सरकार को निर्णय लेना है. सूत्रों ने बताया कि जुलाई में 23 को मनाया जाने वाला वन महोत्सव में "संस्कृति वन' मूर्त रूप देने की शुरुआत होने की संभावना है. फिलहाल संस्कृति वन को महाकाल नगरी उज्जैन, चित्रकूट, भोजपुर, ओमकारेश्वर और मैहर में बनाने पर मंथन चल रहा है.
संस्कृति वन हर साल एक ही तैयार किया जाएगा. इसकी डिजाइन इस प्रकार बनाई जा रही है, ताकि पर्यटक भी इस ओर आकर्षित हो. दअरसल, संस्कृति वन स्थानीय कल्चरल, धार्मिक और ऐतिहासिक थीम पर डेवलप किया जाएगा. गुजरात में संस्कृति डेढ़ हेक्टेयर से लेकर 15 हेक्टेयर में डिवेलप किया गया है.
इनमें से अधिकांश संस्कृति 1 राजस्व भूमि पर बने हुए हैं. लेकिन मप्र में राजस्व भूमि बची नहीं है, इसलिए वन भूमि पर डेवलप करने का विचार किया जा रहा है. इसका क्षेत्रफल लगभग 4 से 5 हेक्टेयर निर्धारित किए जाने पर मंथन चल रहा है.
तीन दिवसीय दौरे पर गुजरात गया था अध्ययन दल-
सूत्रों ने बताया कि चार सदस्य अध्ययन दल में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) यूके सुबुद्धि, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) सेंधवा डीएफओ अनुपम शर्मा और अलीराजपुर डीएफओ मयंक सिंह गुर्जर शामिल थे. तीन दिवसीय दौरे के दौरान अध्ययन दल ने अहमदाबाद, गांधीनगर और सुरेंद्र नगर में बने संस्कृति वन का निरीक्षण किया और उसका अध्ययन भी किया. खासतौर से पंचवटी वन, नक्षत्र वन, राशि वन और आरोग्य वन का अध्ययन भी किया गया.
2004 से मोदी ने की थी शुरुआत-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में संस्कृति वन बनाने की शुरुआत 2004 से की थी. तब हुए गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. तब से आज तक गुजरात में हर साल एक संस्कृति वन डेवलप किया जा रहा है. वर्ष 2016 में एक साथ 4 संस्कृति वन बनाए गए थे. अब तक 22 संस्कृति वन गुजरात में बन चुके हैं.
इनका कहना-
यूके सुबुद्धि, एपीसीसीएफ विकास का कहना है कि तीन दिवसीय दौरे पर गुजरात गए थे. गुजरात में बनाए गए संस्कृति वन का अध्ययन किया. लौटने के बाद मंगलवार को अध्ययन रिपोर्ट शासन को सौंप दी है. अब शासन को निर्णय करना है.