सुप्रीम कोर्ट ने आज जुलाई 2022 प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के फैसले की समीक्षा के लिए सुनवाई की। बता दें कि कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमण ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को दो पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की थी। जिसमें शामिल है- 1. ECIR (ED की तरफ से दर्ज FIR) की रिपोर्ट आरोपी को न देने का प्रावधान, 2. खुद को निर्दोष साबित करने का ज़िम्मा आरोपी पर होने का प्रावधान।

PMLA पर कार्ति चिदंबरम की समीक्षा याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट PMLA के फैसले पर पुनर्विचार के लिए तैयार है और इस संबंध में केंद्र को नोटिस भी जारी किया गया। कार्ति चिदंबरम की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी।

चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा, हमने पाया कि PMLA फैसले के केवल दो बिंदुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें दो मुद्दों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है और उन दो मुद्दों में से पहला मुद्दा, आरोपी को ECIR की कॉपी नहीं देना और दूसरा मुद्दा, खुद को निर्दोष साबित करने का ज़िम्मा आरोपी पर होने का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर इस पर जवाब मांगा है। केंद्र की तरफ से तुषार मेहता ने कहा कि इन सीमित मुद्दों पर ही नोटिस जारी किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया हम फैसले के दो पहलुओं पर ही पुनर्विचार करेंगे।