भोपाल: राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हर बारह साल में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ हेतु आरक्षित अधिक भूमि डिनोटिफाई नहीं की जायेगी। उज्जैन में अगला सिंहस्थ 2028 में होना है। सिंहस्थ हेतु आरक्षित भूमि पर कोई अवैध कालोनी न बने इसके लिये उज्जैन नगर में 17 एफआईआर सिंहस्थ मेला क्षेत्र के लिए आरक्षित भूमि पर कालोनी काटने वाले के विरुद्ध दर्ज हुई है।

राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिकृत जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ 2004 के दौरान कुल भूमि 2159.976 हेक्टेयर को मेला अधिकारी उज्जैन द्वारा सिंहस्थ हेतु आरक्षित किया गया था, परन्तु उक्त भूमि के अधिकांश हिस्से पर विगत दो सिंहस्थ पर्व के दौरान कोई उपयोग या अन्य किसी कार्य हेतु नहीं किया गया। उक्त भूमि को डो- नोटिफाईड करने हेतु प्रतिवेदन तैयार किया गया था।

वर्ष 2020 में सिंहस्थ क्षेत्र हेतु आरक्षित भूमियों का पुन: परीक्षण कराया गया। परीक्षण में पायी गई ऐसी भूमि/सर्वे क्रमांक जो सिंहस्थ 2004 एवं 2016 में उपयोग में नही आई, उसमें कस्बा उज्जैन स्थिति शासकीय भूमि 72.15 हेक्टेयर व निजी भूमि 99.94 हेक्टेयर है। वर्ष 2004 में सिंहस्थ पर्व हेतु कुल 2154.46 हेक्टेयर भूमि अधिसूचित की गई थी एवं वर्ष 2015 में सिंहस्थ पर्व हेतु कुल 4164.29 हेक्टेयर भूमि (स्थाई एवं अस्थाई अधिग्रहण) अधिसूचित की गई थी।

इस प्रकार वर्ष 2004 की तुलना में 2016 में लगभग 90 प्रतिशत से अधिक भूमि सिंहस्थ पर्व की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये अधिसूचित की गई। चूंकि सिंहस्थ पर्व प्रदेश का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती जा रही है, इसलिये आयोजन के समय पड़ाव क्षेत्र, पार्किंग, स्टेलाईट टाउन, हेलीपेड, यातायात भीड़ प्रबंधन इत्यादि हेतु व्यापक पैमाने पर रिक्त भूमि की आवश्यकता होती है।

ऐसे में कोई भी भूमि डिनोटिफाइ करने के पूर्व विभिन्न स्टेकहोल्डर्स एवं विभिन्न विभागों के बीच चर्चा एवं युक्तियुक्त परामर्श उपरांत ही किया जाना संभव है। इसलिये अभी कोई भूमि डिनोटिफाई नहीं की जायेगी।