भोपाल: पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा है कि पूरे प्रदेश की जनता पीने के पानी के संकट से जूझ रही है. पानी को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है. सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग सवा करोड़ घर हैं लेकिन 40 प्रतिशत में ही नल लगे हैं. 11000 करोड़ से अधिक खर्च फिर पानी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. सरकार सबको पानी उपलब्ध कराने में असफल हो गई है.

अजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह हमेशा की तरह समस्या विकराल होने के बाद मीटिंग लेकर अधिकारियों को हिदायत देने लगते हैं. उन्होंने कहा कि समस्या का पूर्वानुमान लगाकर जो मीटिंग उन्हें जनवरी माह में ही लेकर प्लान करना थी, वह चार महीने बाद हो रही है.

उन्हें शासन में 17 साल हो गये लेकिन पेयजल समस्या का स्थाई समाधान अभी तक नहीं हो पाया है. भारी भरकम बजट और करोड़ों रूपये खर्च होने के बाद भी समस्या जस की तस है. टंकियां बन गई हैं, तो पाइप लाइन नहीं बिछी. पाइप डल गये हैं तो जल स्त्रोत में पानी की कमी हो गई. तीनों चीजें उपलब्ध हैं तो बिजली कटौती और कम दाब के कारण टंकियां नहीं भर पा रही हैं. इसके बाद रही सही कसर टेंकर माफिया सक्रिय होकर पूरी करने लगते हैं. वे विपत्ति को अवसर में बदलने में लग जाते हैं.

ये हैं उदाहरण

* इंदौर में 59 स्थानों का पानी 2019 से पीने लायक नहीं है लेकिन कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं. कोलीफार्म बैक्टीरिया पनपने के कारण लोगों को पेट की गंभीर बीमारियाँ हो रही है.
* सतना के जल स्त्रोत में तीन हफ्ते का पानी बचा है. वहां 150 करोड़ की योजना किस काम की है? हर साल नगर निगम को बाणसागर से लाखों रूपये का पानी खरीदना पड़ता है|.
* ग्वालियर शहर और संभाग में अमृत योजना में 350 करोड़ खर्च हो गये फिर भी गंदे पानी की सप्लाई हो रही है.
* भोपाल में 35 लाख की आबादी के लिए पानी उपलब्ध है. जबकि राजधानी की आबादी 22 लाख है. फिर भी सवा लाख आबादी ट्यूबवेल और टेंकरों पर पूरी तरह निर्भर है. लगभग 600 अवैध कालोनियां और 150 अन्य कालोनियां या तो नगरनिगम के नेटवर्क से बाहर हैं या वे बल्क कनेक्शन लेने तैयार नहीं हैं.
* 52 जिलों में जल जीवन मिशन में चार हजार योजनाओं के पूरे होने का दावा कागजों में किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता कोसों दूर है.