माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा दसवीं-बारहवीं की परीक्षाओं में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स को बेसब्री से अपने रिजल्ट का इंतजार है। दोनो ही कक्षाओं का मूल्यांकन लगभग पूरा होने को है, ऐसे में अब रिजल्ट इस महीने के आखिर में या मई के पहले सप्ताह में जारी हो सकता है। इस बार खास बात यह भी है दोनो ही कक्षाओं की मेरिट लिस्ट भी जारी होगी। ऐसे में उन विद्यार्थियों में खासा उत्साह है, जिन्होंने मेरिट में आने के लिए खूब मेहनत की है।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के चलते बीते दो सालों में स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित होने के साथ ही परीक्षाओं का आयोजन भी प्रभावित हुआ था। ऐसे में इन दो सालों में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आंतरिक परीक्षाओं के आधार पर रिजल्ट तो जारी किए गए थे, लेकिन मेरिट लिस्ट नहीं बन सकी थी। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों ने अपनी तैयारी के अनुरूप रिजल्ट नहीं आने की शिकायत की थी। हालांकि इस बार ऐसा नहीं होगा। इस बार बोर्ड ने एग्जाम पैटर्न में बदलाव के साथ ही मेरिट जारी करने का निर्णय लिया है, जो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत है। बता दें की बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से 12 मार्च और 12वीं की परीक्षा 18 फरवरी से 10 मार्च के बीच आयोजित की थी। इस साल दोनों कक्षाओं में करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल हुए हैं।
सोमवार तक तारीख का ऐलान
फिलहाल मंडल की ओर से नतीजों को लेकर कोई तारीख फाइनल नहीं की गई है, लेकिन इस बार कॉपी चेकिंग का काम तेज है, जिससे उम्मीद लगाई जा रही है कि नतीजे जल्द जारी होंगे। मंडल के सूत्रों की मानें तो उच्च स्तर पर रिजल्ट को लेकर बैठक होने के बाद रिजल्ट जारी करने की तारीख तय कर दी गई है, जो आगामी सोमवार तक घोषित हो सकती है।
इधर हेल्पलाइन कॉल्स की संख्या में हुआ इजाफा
रिजल्ट को लेकर मंडल हेल्पलाइन पर स्टूडेंट्स के कॉल्स की संख्या में भी इजाफा होने लगा है। हेल्पलाइन पर रोजाना करीब 450 कॉल पहुंच रहे हैं। जिनमें 90 प्रतिशत कॉल बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट को लेकर है। करीब दो साल बाद एग्जाम में शामिल होने के चलते विद्यार्थियों में रिजल्ट को लेकर उत्सुकता के साथ ही जोश तनाव भी है, ऐसे में वह तरह-तरह के सवाल कर रहे है। जिसका रिजल्ट खराब होने पर क्या करें, पेरेंट्स की अधिक उम्मीद सहित कई तरह के सवाल शामिल हैं। हालांकि काउंसलर लगातार विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर रहे हैं और तनाव से दूर रहने की समझाइश दे रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को भी सलाह दी जा रही है कि बच्चों का ध्यान रखें और उनकी योग्यता का आकलन अंको से न करें।