मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 27 फरवरी से शुरू हो गया है. 1 मार्च को राज्य का नया बजट पेश होना है. ऐसे में बेरोजगार युवाओं के लिए यह बजट कितना फायदेमंद साबित होगा? इस पर सबकी नज़र हैं. 

मध्यप्रदेश में 8 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव से पहले ही विपक्ष बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर एक बार फिर सरकार को घेरने में जुट गया है. अब शिवराज सरकार का बजट में युवाओं पर कितना फोकस रहेगा, यह तो नया बजट 2023-24 पेश होने के बाद ही पता चलेगा.

एमपी में चरम पर बेरोजगारी-

फ़िलहाल, मध्यप्रदेश में बेरोजगारी का आलम क्या हैं? यह जानने के लिए आपको, हाल ही में प्रदेश सरकार ने पटवारी के 7 हजार पदों के लिए निकाली वैकेंसी पर कितने आवेदन जमा हुए यह जानना चाहिए.

हैरानी की बात तो यह है कि सिर्फ 7 हजार पदों के लिए 12 लाख से ज्यादा आवेदन भरे जा चुके हैं. इन आकड़ों से एक बात तो तय हैं कि प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर हैं. साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी आकड़ों में 15 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं. शायद इसीलिए सिर्फ़ 7 हजार पदों के लिए 12 लाख से ज्यादा फॉर्म जमा हुए हैं.

इन आकड़ों को देख अब बेरोजगार युवा भी प्रदेश सरकार से बेरोजगारी भत्ते की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक नौकरी नहीं मिल जाती तक सरकार बेरोजगारी भत्ता दें.

चुनाव नजदीक है तो मौसम की तरह ही सियासत भी काफी गर्म हैं. विपक्ष बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर शिवराज सरकार को घेरने के प्रयास में जुट गया है. तो वहीं सरकार बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के दावे करती हुई दिखाई दे रही हैं.

इन सब के बीच ताज़ा आकड़े तमाम दावों के पोल खोलने के लिए काफी हैं. ऐसे में नया बजट युवाओं की उम्मीद पर कितना खरा उतरता है, यह देखने लायक होगा.