बिजली संकट: शहरों में पर्दा, गांवों में हाहाकार:
मप्र में बिजली की अघोषित कटौती का कहर गांवों पर टूटने लगा है, किसानों से लेकर ग्रामवासी और कस्बे के लोग इसे लेकर परेशान है। मगर शहरों को बिजली देकर और गांव-कस्बों में मेंटेनेंस का तर्क देकर अफसर संकट पर परदा डालने की कोशिश में है। फिलहाल मप्र भीषण बिजली संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है। तमाम अनुबंधों व दावों के बाद भी जितनी खपत है, उतनी बिजली नहीं है। बताया जाता है कि औसतन हर रोज बिजली की 12 हजार मेगावाट की जरूरत पड़ रही है लेकिन 10 हजार मेगावाट के आसपास की उपलब्धता है। इसी कमी को पूरा करने के लिये ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती की जा रही है।
भोपाल: CM शिवराज के भाषण में बिजली गुल, मुस्कुराकर बोले- " देश में कोयला संकट है" pic.twitter.com/T1ILaZ8RjI
— News24 (@news24tvchannel) April 21, 2022
हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश में सिंचाई के साधन बढ़े हैं। जिससे गर्मी में बड़े पैमाने पर सब्जी और उड़द मूंग की खेती होने लगी है। चूंकि कोविड काल में दो साल उद्योग धंधे बंद रहे और अब यह रफ्तार पकड़ रहे हैं लिहाजा खपत बढ़ रही है। गर्मी के चलते एसी कूलर पंखों का इस्तेमाल भी ज्यादा हो रहा है।
सूत्रों की मानें तो पावर मैनेजमेंट कंपनी ने प्रदेश के हिस्से की करीब हजार मेगावाट बिजली गुजरात और महाराष्ट्र को बांटी है। माना जा रहा है कि यही आलम रहा तो इस बार पूरी गर्मी यानी 30 जून तक मप्र की बिजली दोनों राज्यों को मिलती रहेगी। कंपनी ने 22 हजार मेगावाट बिजली को लेकर एग्रीमेंट किया है। कंपनी ने मार्च के 31 दिन में 33 करोड़ यूनिट बिजली बेंच भी दी। कंपनी हर साल मार्च से अगस्त सितंबर तक बिजली पावर एक्सचेंज में बेचती है। हालांकि उच्चाधिकारियों का तर्क है कि बिजली कार्यों के मेंटेनेंस के चलते बिजली कट रही है, संकट नहीं है।
भाजपा विधायक भी नाराज
मैनेजमेंट या मिसमैनेजमेंट
पावर मैनेजमेंट कंपनी का रोल भी बिजली को मैनेज करने में सवालिया घेरे में है। दरअसल कोरोना काल में भी बिजली की डिमांड गर्मी में 10 हजार मेगावाट से 12 हजार मेगावाट तक पहुंच रही थी। अप्रैल 2021 में वह 10437 मेगावाट थी। अप्रैल 2022 में 12200 है। यानि बिजली की डिमांड बढ़ना भी तय था, लेकिन पावर मैनेजमेंट कंपनी इसका अंदाजा हो नहीं लगा सकी। बिजली उत्पादन के लिये थर्मल प्लॉट्स को रोज 12.5 रेक कोयला चाहिए। जबकि 8.6 क कोयला ही मिल रहा है। मप्र के ऊर्जा मंत्री ने भी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से चर्चा की|
बिजली की कटौती से भाजपा के विधायकों को क्षेत्र में लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा अफसर भेल ही मेंटेनेंस का हवाला देकर बिजली कटौती की बात कह रहे हैं। मगर भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है कि बिजली प्रोडक्शन कम हो रहा है। उन्होंने लिखा अगर बिजली कटौती जरूरी हो है तो इसे शेड्यूल कर दिया जाए। माना जाता है कि कई विधायक बिजली को लेकर परेशानी को बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।