भोपाल. जंगल महकमे में फील्ड के अफसरों की तानाशाही रवैया के खिलाफ वन कर्मचारियों में असंतोष की चिंगारी सुलगने लगी है. यह चिंगारी छतरपुर के बाद सीसीएफ शहडोल पीके वर्मा और छिंदवाड़ा में भी दिखाई देने लगी है. छतरपुर में अभी मामला शांत नहीं हुआ है. सीसीएफ शहडोल पीके वर्मा के खिलाफ वन कर्मचारियों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है. वन कर्मचारी संघ पीके वर्मा को शहडोल से हटाने के लिए सोमवार को कलेक्टर और कमिश्नर से मिलने जा रहा है. 3 मार्च को भोपाल आकर वन मंत्री विजय शाह और प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल से मिलेगा.
मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ ने सीसीएफ वर्मा पर चौकीदारों से घर में झाड़ू-पोछा लगवाने और स्थाई कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि स्थाई कर्मचारी नरेश यादव को बीमार होने पर अवकाश न देते हुए गाली गलौज करने का भी आरोप मढ़ा है. यही नहीं, सीसीएफ वर्मा ने यादव को बीमार अवस्था में काम न करने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया. सीसीएफ वर्मा पर यह भी आरोप है कि नियम विरुद्ध कर्मचारियों के तबादला करने और उन्हें झूठे आरोप मांग के कारण बताओ नोटिस देने का भी आरोप है.
*मनोज अग्रवाल भी कर्मचारियों के असंतोष को नहीं बुझा पाए*
सीसीएफ वर्मा के खिलाफ पनपते असंतोष को शांत करने के लिए वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने भोपाल से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल को शहडोल भेजा था. अग्रवाल ने डीएफओ की उपस्थिति में वन कर्मचारियों से बातचीत की. कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार और खेती कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय के मुद्दे उठाए. उन मुद्दों का निराकरण किए बिना ही अग्रवाल भोपाल लौट आए. इसके पहले छतरपुर में डीएफओ अनुराग कुमार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को लेकर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रशासन- 2) महेंद्र सिंह धाकड़ को छतरपुर भेजा था. महेंद्र सिंह धाकड़ ने अनुराग कुमार को हटाने का आश्वासन दिया तब जाकर वन कर्मचारी शांत हुए. छतरपुर में डीएफओ की प्रताड़ना के चलते एक वन कर्मचारी की हार्ट अटैक से निधन हो चुका है. अनुराग कुमार के डीएफओ पद पर ज्वाइन होते ही छतरपुर में फिर उनके खिलाफ असंतोष की चिंगारी सुलगने लगी है.
*पश्चिम छिंदवाड़ा में भी रिपोर्ट खिलाफ असंतोष*
पश्चिम सामान्य वन मंडल छिंदवाड़ा के वन मंडल अधिकारी ईश्वर जरांडे द्वारा शासन के नियमो के विपरीत कार्यवाही करते हुए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. विदित हो की वर्तमान में राज्य शासन द्वारा पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है किंतु शासन के आदेशों को न मानते हुए डीएफओ द्वारा कर्मचारियों का स्थानान्तरण किया जा रहा है. वनमंडलाधिकारी मुख्य वनसंरक्षक की भी नही सुनते है स्थानान्तरण जैसी कार्यवाही से भी ईनके द्वारा मुख्य वनसंरक्षक को अवगत नही कराया जाता.
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जंगल महकमें में फील्ड के अफसरों के खिलाफ सुलगती असंतोष की चिंगारी
छतरपुर के बाद सीसीएफ शहडोल और छिंदवाड़ा में आंदोलन