भोपाल: मप्र सरकार ने अपनी महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई में स्थित दो सम्पत्तियों को बेचने की तैयारी कर ली है। पहली सम्पत्ति मुम्बई के मजगांव डिविजन में टैंक बंदर रोड पर स्थित है जोकि 10 हजार 460 वर्गमीटर में है तथा इसका आफसेट मूल्य 85 करोड़ 76 लाख रुपये रखा गया था।

जबकि दूसरी सम्पत्ति भी मजगांव डिविजन के बाबूलाल टैंक एवं राम चन्द्रा रोड पर 2295 वर्गमीटर की प्रिंसेज बिल्डिंग है जिसका आफसेट मूल्य 81 करोड़ 1 लाख रुपये रख गया है। इन दोनों सम्पत्तियों को यथास्थिति में बेचा जा रहा है क्योंकि इनमें पिछले कई दशकों से अतिक्रमण है। इनके टेण्डर फायनल हो गये हैं तथा उच्चतम बोली जगाने वाले बिडर को इसे बेचने के लिये भोपाल स्थित मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के पास प्रस्ताव भेजा गया है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की सम्पत्तियों के विक्रय के लिये दो साल पहले लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग गठित किया गया है तथा इसने अब तक कुल 54 सम्पत्तियां बेचने के लिये चिन्हित की हुई हैं। जिन सम्पत्तियों को बेचने के लिये उच्चाधिकार समिति से स्वीकृति मिल जाती है उनके टेण्डर जारी किये जाते हैं।

वर्ष 2020-21 एवं वर्ष 2021-22 में लोक परिसम्पत्ति विभाग ने कुल 28 सम्पत्तियों को बेचने के टेण्डर जारी किये जिनकी कुल आफसेट प्राईज 355 करोड़ रुपये है। टेण्डर में अफसेट प्राईज से ज्यादा कुल 525 करोड़ रुपये के ऑफर आये हैं तथा अब तक राज्य के खजाने में 174 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। वर्तमान वित्त वर्ष जोकि 31 मार्च 2022 को समाप्त हो रहा है, 26 करोड़ रुपये और खजाने में जमा कराने का लक्ष्य है तथा शेष राशि अगले वित्त वर्ष में हासिल हो जायेगी।

केंद्र सरकार देगी प्रोत्साहन राशि :

मप्र, देश में ऐसा पहला राज्य जिसने अपनी बेकार पड़ी सम्पत्तियों को बेचने के लिये एक विभाग बनाया हुआ है तथा उसके इस नवाचार की केंद्र सरकार ने सरहाना की है तथा अन्य राज्यों को इसके लिये प्रेरणा देने के लिये स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस ऑफ स्टेट फॉर केपिटल एक्सपेंडीचर लांच की है।

इस स्कीम के तहत जो राज्य अपनी सम्पत्तियों का विक्रय करेंगे उन्हें बेचने से प्राप्त कुल राशि के एक तिहाई के बराबर राशि प्रोत्साहन स्वरुप दी जायेगी। मप्र सरकार को अगले वित्त वर्ष में 525 करोड़ रुपये की एक तिहाई राशि प्रोत्साहन स्वरुप केंद्र सरकार से इस स्कीम के तहत प्राप्त होगी।