भोपाल। देश की बड़ी कंपनी अडानी के लिये मप्र सरकार ने 385 करोड़ रुपये का बकाया छोड़ेगी। राज्य के जल संसाधन विभाग ने इस बकाया राशि को निकाला था। दरअसल 29 जून 2006 को सिंगरौली जिले के बंधौरा में स्थित मेसर्स एस्सार पॉवर एमपी लिमिटेड की 2000 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना के लिए रिहन्द जलाशय से 71.54 मिलियन घनमीटर वार्षिक जल संसाधन विभाग की जल आवंटन समिति ने जल आवंटित किया था। कंपनी द्वारा प्रथम इकाई से 26 जून 2013 को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया गया, परन्तु द्वतीय इकाई से आज तक वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं हुआ है।

कम्पनी द्वारा 26 जुलाई 2016 को जल की मात्रा को कम करने का आवेदन दिया गया जिस पर वार्षिक जल को 46.87 मिघमी वार्षिक कर दिया गया। परन्तु कंपनी ने कम की गई इस जल की मात्रा के लिये जल संसाधन विभाग से कोई अनुबंध नहीं किया।

बाद में एस्सार पॉवर कंपनी ने 6 दिसम्बर 2021 को पत्र लिखा कि कम्पनी की वित्तीय स्थिति ठीक न होने कारण 29 सितम्बर 2020 को दिवाला एवं दिवालियापन संहिता 2016 के तहत कम्पनी का आवेदन नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल-एनसीएलटी द्वारा स्वीकार्य किया गया। एनसीएलटी द्वारा 1 नवम्बर 2021 को मेसर्स अडानी पॉवर लि. का टेकओवर प्लान स्वीकृत किया गया, जिसमें जल संसाधन विभाग की एस्सार पॉवर लि. सिंगरौली पर बकाया राशि के संबंध में कोई उल्लेख नहीं है।

एस्सार पॉवर कंपनी द्वारा (जोकि अडानी पॉवर लि. के आधीन हो गई है) 5 फरवरी 2022 एवं 23 फरवरी 202 को जल आवंटन संशोधित करने के संबंध में आवेदन किया गया है, जिसमें उल्लेखित है कि जल संसाधन विभाग द्वारा प्रस्तुत 384.58 करोड़ रुपये की देनदारी को एनसीएलटी द्वारा मान्य नहीं किया गया है। साथ ही यह भी कहा कि यदि जल संसाधन विभाग, एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत टेक ओवर प्लान के विरूद्व किसी भी अन्य उच्च कोर्ट में जाता है एवं कोर्ट द्वारा देनदारी के संबंध में आदेश पारित किया जाता है, तो ऐसा कोई भी आदेश कम्पनी को मान्य होगा। कंपनी ने यह भी निवेदन किया कि कम्पनी को आवंटित जल 46.87 मिघमी को संशोधित करते हुए 26 मिघमी वार्षिक किया जाये। इस पर अब जल आवंटन समिति ने जल आवंटन को कम कर 26 मिघमी वार्षिक कर दिया है।

इनका कहना है :
हमने अडानी कंपनी द्वारा अधिग्रहित एस्सार कंपनी के लिये जल की मात्रा कम कर दी है परन्तु शर्त लगाई है कि कम की गई जल की मात्रा का नया अनुबंध तभी होगी जबकि पुराना बकाया अदा किया जाये। यदि कंपनी एनसीएलटी के निर्णय का हवाला देकर अनुबंध करती है तो मामला केबिनेट के समक्ष भेजा जायेगा और वहां से मंजूरी मिलने पर 385 करोड़ रुपये का बकाया माफ कर दिया जायेगा।
- जीपी सोनी, सदस्य सचिव, जल आवंटन समिति, जल संसाधन, भोपाल