मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण शुक्रवार सुबह 6 बांधों के गेट खोल दिए गए। भोपाल में कोलार डैम के 4 गेट, कलियासोत के 3 गेट, भदभदा के दो गेट, नर्मदापुरम के तवा डैम के 5 गेट, अशोकनगर के राजघाट के 8 गेट और जबलपुर के बरगी के 7 गेट खोले गए हैं।
भोपाल के भदभदा डेम के दो गेट खोले गए हैं। महापौर मालती राय ने पूजा अर्चना की, इसके बाद गेट खोले गए। इस मौके पर नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण भी मौजूद रहे। लगातार भारी बारिश के चलते शुक्रवार, 2 अगस्त को सुबह भोपाल के कलियासोत डैम और तवा डैम के गेट भी खोले गए।
जिले में लगातार हो रही भारी वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए कोलार डैम का वाटर लेवल मेंटेन रखने के लिए दो गेट और खोल दिए गए हैं। कोलार परियोजना की कार्यपालन यांत्रिक हर्षा जैनवाल ने जानकारी दी कि दो गेट पहले ही खोल दिए गए थे। इस प्रकार कोलार डैम के चार गेट कुल 7 मीटर तक खोल दिए गए हैं।
कलेक्टर प्रवीण सिंह तथा कार्यपालन यंत्री हर्षा जैनवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे कोलार नदी, कोलार नहर तथा बांध प्रभावित क्षेत्र में नहीं जाएं तथा किसी प्रकार की गतिविधि न करें।
राज्य के 6 जिले भारी से बहुत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने 30 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। भोपाल और रायसेन के भी कुछ इलाके जलमग्न हैं। भारी बारिश के चलते सीहोर कलेक्टर ने सभी स्कूलों और आंगनबाड़ियों में छुट्टी घोषित कर दी।
मध्य प्रदेश में सीज़न की 55% या औसतन 19.7 इंच बारिश होती है। जून और जुलाई में कोटे से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगस्त के पहले दिन प्रदेश के 23 जिलों में बारिश हुई। मॉनसून ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण के कारण सिस्टम मजबूत है। यह सिस्टम 5 अगस्त तक पूरे प्रदेश को भिगोता रहेगा।
आईएमडी, भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने कहा कि गुरुवार को मप्र में मानसूनी बारिश हुई। पश्चिम बंगाल के ऊपर सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण तंत्र मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने लगा है। एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राजस्थान पर है। दो अन्य प्रणालियाँ भी सक्रिय हैं। इसके चलते प्रदेश में बारिश की स्थिति बनी रही।
2 अगस्त से सिस्टम की जोरदार सक्रियता देखने को मिलेगी। इसलिए, रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
इस बार प्रदेश में मानसून 21 जून को सक्रिय हुआ था। 40 दिन मेंही मानसून की आधी से ज्यादा बारिश जून-जुलाई में ही हो चुकी है। अब तक हुई बारिश का कोटा भी पूरा हो चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक अब तक औसतन 18.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन 19.7 इंच पानी गिर चुका है। इस प्रकार 1.6 इंच अधिक बारिश हो चुकी है। ये 9% ज्यादा है।
प्रदेश में सर्वाधिक वर्षा सिवनी जिले में 32 इंच हुई। यह कोटा बारिश से 10.80 इंच ज्यादा है। मंडला, नर्मदापुरम, भोपाल, रायसेन और छिंदवाड़ा ऐसे जिले हैं जहां बारिश का आंकड़ा 25 इंच या उससे ज्यादा है। रीवा सबसे पिछड़ा जिला है। यहां सिर्फ 8 इंच बारिश हुई है। अब तक राज्य में कुल मिलाकर 9% अधिक बारिश हो चुकी है। जिसमें पूर्वी भाग में 2% और पश्चिमी भाग में 15% अधिक पानी कम हुआ है।