भोपाल: एनजीटी के आदेश के पालन में राज्य के जल संसाधान विभाग ने अपने सिर्फ सात निर्माणाधीन बांध परियोजनाओं में 15 से 20 प्रतिशत एनवायरमेंटल फ्लो का प्रावधान किया है। दरअसल एनजीटी ने जलीय जीवों की सुरक्षा के लिये ग्रीष्मकाल में भी 22 नदियों के बाांधों से 15 से 20 प्रतिशत पानी निरन्तर छोड़े जाने का आदेश दिया है।
चूंकि ये 22 नदियां बारहमासी नहीं हैं, इसलिये जल संसाधन विभाग ने इनमें ई-फ्लो की व्यवस्था को संभव नहीं बताया है। ये 22 नदियां हैं : गोहद, बिछिया, टोंस, कटनी, सिमरार, कुंदा, मलेनी, मंदाकिनी, नेवज, बेनगंगा, सोन, पर्वती, चौपन, कन्हान, क्षिप्रा, चंबल, चामला, ताप्ती, खान, कलियासोत, बेतवा एवं एक अन्य।
जल संसाधन विभाग ने कहा है कि मुरैना के घडिय़ाल, डॉल्फिन एवं अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु चंबल नदी में प्रत्येक सोमवार 35 मिनट के लिये 5 हजार क्यूसेक पानी कोटा बेराज के डाउन स्ट्रीम में माह जनवरी से मानसून प्रारंभ होने तक छोड़ा जाता है।
सात निर्माणाधीन परियोजनाओं यथा माहनपुरा बांध की नेवज नदी, पारसडोह बांध की ताप्ती नदी, वर्धा डेम की वर्धा नदी, निगुर्ण बांध की पोटफोड़ी, मेड़ा बांध की ताप्ती नदी, घोघरी बांध की ताप्ती नदी एवं सुठालिया बांध की पार्वती नदी में जलीय जीवों के लिये ई-फ्लो का प्रावधान किया गया है।