भोपाल: देश के असम राज्य के जंगलों से पहले चरण में 20 जंगली भैंसे मप्र के कान्हा टाईगर रिजर्व में आयेंगे। इसके लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान असम के सीएम हिमन्ता बिश्वा सरमा को पत्र भेजा है। पत्र का यह प्रारुप वन विभाग की वन्यप्राणी शाखा ने तैयार कर भेजा है। हालांकि पिछले दिनों असम के सीएम भोपाल आये थे परन्तु उस समय वन विभाग की तैयारी न होने से शिवराज चौहान की उनसे जंगली भैंसे देने के संबंध में कोई चर्चा नहीं हो पाई थी।
उल्लेखनीय है कि कान्हा नेशनल पार्क में 40 साल पहले जंगली भैंसे पाए जाते थे। धीरे-धीरे वे विलुप्त हो गये । अब राज्य सरकार एक बार फिर राज्य के जंगलों को जंगली भैंसों से आबाद करने की कोशिश कर रही है। एशियाई जंगली भैंसों की संख्या वर्तमान में चार हजार से भी कम है। जंगली भैंसे, जो एक सदी पहले तक पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में बड़ी संख्या में पाए जाते थे, आज केवल भारत, नेपाल, बर्मा और थाईलैंड में पाए जाते हैं। वे भारत के असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।
मध्य भारत में, वे छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और बीजापुर जिले के कुटरू में इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं। जंगली भैंसे की एक प्रजाति, जिसके सिर पर सफेद निशान होता है, पहले मध्य प्रदेश के जंगलों में भी पाई जाती थी, लेकिन अब विलुप्त हो गई है। मादा जंगली भैंसा अपने जीवनकाल में पांच बच्चों को जन्म देती है। इनका जीवनकाल नौ वर्ष का होता है।
आमतौर पर मादा जंगली भैंस और उनकी संतानें झुंड में रहती हैं और नर झुंड से अलग रहती हैं। लेकिन अगर झुंड की कोई मादा गर्भधारण करने के लिए तैयार हो तो सबसे ताकतवर नर किसी दूसरे नर को अपने पास नहीं आने देता। यह नर आमतौर पर झुंड के आसपास रहता है। नर बच्चे दो साल की उम्र में झुंड छोड़ देते हैं। जंगली भैंसे अक्सर बरसात के मौसम के अंत में पैदा होते हैं।