भोपाल: राज्य भूमि सुधार आयोग जोकि राज्य भूमि अधिग्रहण बोर्ड भी घोषित किया गया है, 1 जनवरी 2014 से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा अपनी परियोजनाओं के लिये किये गये भूमि अधिग्रण संबंधी कार्यवाहियों की समीक्षा करेगा।

इस संबंध में बोर्ड के सदस्य सचिव अशोक गुप्ता ने इस संबंध में विभिन्न विभागों को जारी पत्र में कहा है कि परियोजनाओं के लिये आवश्यक भूमि के अर्जन की कार्यवाही संबंधित जिलों में प्रचलित होगी लेकिन भूमि अधिग्रहण के मामलों को त्वरित गति से निराकृत करने के उद्देश्य ये बोर्ड द्वारा यह समीक्षा की जा रही है। इसलिये 1 जनवरी 2014 से अब तक के सभी निराकृत/विचाराधीन मामलों की जानकारी निर्धारित प्रारुप में बोर्ड को भेजी जाये ताकि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यव्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के अंतर्गत कार्यवाही समय-सीमा में पूर्ण की जा सके।

बोर्ड ने निर्धारित प्रारुप में यह भी जानकारी मांगी है कि परियोजना हेतु वन, पर्शवरण एवं अन्य संबंधित स्वीकृति की स्थिति क्या है तथा मुअवजे की राशि कितनी है एवं भूमि के आधिपत्य की स्थिति क्या है।