भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग के अमीनों ने कहा है कि उन्हें सिंचाई राजस्व की वसूली में न लगाया जाये क्योंकि अमीनों के कार्यक्षेत्र में राजस्व वसूली का कार्य नहीं आता है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी उनकी इस समस्या पर विभाग को नोटशीट भेजकर कार्यवाही करने के लिये कहा है।
प्रदेश में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत कुल 960 अमीन कार्यरत हैं तथा ये क्लास थ्री के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने मंत्री को कहा है कि सिंचाई अधिनियम 1931 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2012 को प्रमुख अभियंता ने आदेश जारी किया था कि अमीनों के कार्यक्षेत्र में राजस्व वसूली का कार्य नहीं आता है।
ये भी समस्यायें बताई :
अमीनों ने अपनी और भी समस्यायें विभागीय मंत्री को बताई हैं। इसमें शामिल हैं : एक, अमीन का पदनाम परिवर्तन कर सिंचाई विस्तार अधिकारी किया जाये, जिस प्रकार से कृषि विभाग में ग्राम सेवक को ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नाम दिया गया है। दो, राजस्व पटवारियों की भांति एक हजार रुपये प्रति माह स्टेशनरी भत्ता अमीनों को भी दिया जाये। तीन, अनुकम्पा नियुक्ति में परिवीक्षावधि 3 वर्ष के बजाये 2 वर्ष की जाये एवं वेतन 100 प्रतिशत दिया जाये। चार, अमीनों के यात्रा देयक 3 वर्षों से लंबित हैं जिनका शीघ्र भुगतान कराया जाये। पांच, अमीनों को लगभग 15 वर्ष पुराने खसरे प्रदाय किये गये हैं, इसलिये उन्हें नवीन कम्प्यूटरीकृत खसरे व नक्शे प्रदान किये जायें।
जारी हुआ पत्र :
अमीनों की समस्याओं को हल करने के लिये मंत्री की नोटशीट आने पर प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी मैदानी मुख्य अभियंताओं को पत्र जारी कर कार्यवाही करने के लिये कहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि अमीनों की समस्याओं के संबंध में यदि शासन स्तर से आदेश जारी किया जाना है, तो इस संबंध में स्पष्ट अभिमत के साथ प्रस्ताव भेजा जाये।