कूनो नेशनल पार्क में विदेश से लाए गए एक और चीते की मौत हो गई है। दक्षिण अफ्रीका से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई मादा चीता दक्षा को मंगलवार को मॉनिटरिंग दल द्वारा घायल अवस्था में पाया गया। पशु चिकित्सकों द्वारा उसे बचाने का प्रयास किया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
कूनो में तीन महीने के अंदर यह तीसरे चीते की मौत हुई है। दक्षा की मौत का कारण बीमारी नहीं बल्कि एक अन्य चीते से लड़ाई को बताया जा रहा है। मादा चीता दक्षा पर पाये गये घाव प्रथम दृष्टया मेल से हिंसक इन्टरेक्शन संभवतः मेटिंग के दौरान किया गया प्रतीत होता है। नर कोयलिशन चीता द्वारा मेटिंग के दौरान मादा चीतों के साथ हिंसक व्यवहार सामान्य है। ऐसी स्थिति में निगरानी टीम द्वारा हस्तक्षेप की संभावना लगभग न के बराबर होती है।

कूनो में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के महानिरीक्षक डॉ. अमित मल्लिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान के डॉ. कमर कुरैशी, दक्षिण अफ्रीका से आये प्रो. एड्रियन टोर्डिफ तथा दक्षिण अफ्रीका से आये चीता मेटा पापुलेशन इनिशियटिव के मिस्टर विन्सेंट वेन डर मार्व की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार बाड़ा क्रमांक 7 में मौजूद दक्षिण अफ्रीका से आये चीता मेल कोयलिशन अग्नि तथा वायु को मादा चीता दक्षा के साथ मिलाने का निर्णय लिया गया जिसके फलस्वरूप बाड़ा क्रमांक 7 एवं 1 के बीच का गेट दिनांक 01.05.2023 को खोला गया। चीता मेल कोयलिशन दिनांक 06.05.2023 को बाड़ा क्रमांक 7 से बाड़ा क्रमांक 1 में दाखिल हुआ।
मृत मादा चीता का शव परीक्षण पशु चिकित्सक दल द्वारा किया जा रहा है। इससे पहले साशा और उदय चीता की भी कूनो में मौत हो चुकी है।
कूनो में तीसरे चीते की मौत पर भड़के अखिलेश, जानिए क्या कुछ कहा?
कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए एक और चीते की मौत हो गई है। दक्षिण अफ्रीका से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ी गई मादा चीता दक्षा को मंगलवार को मॉनिटरिंग दल द्वारा घायल अवस्था में पाया गया। पशु चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन बचाया नहीं जा सका।
कूनों में चीते की मौत की ख़बर को लेकर अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उनका कहना है, कि “कूना में तीसरे चीते की मौत दरअसल प्रशासनिक हत्या है। केवल राजनीतिक प्रदर्शन के लिए जो भाजपाई मजमा खड़ा किया था, उसका ये दायित्व भी बनता था कि विदेशी चीतों को बीमारी व आपसी संघर्ष से मुक्त सुरक्षित माहौल दें। ये जानवरों पर क्रूरता का स्पष्ट मामला है, इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई हो।”
कूनो में तीन महीने के अंदर तीसरे चीते की मौत हुई है। दक्षा की मौत का कारण बीमारी नहीं बल्कि एक अन्य चीते से लड़ाई को बताया जा रहा है। मादा चीता दक्षा पर पाये गये घाव प्रथम दृष्टया मेल से हिंसक इन्टरेक्शन संभवतः मेटिंग के दौरान किया गया प्रतीत होता है। नर कोयलिशन चीते द्वारा मेटिंग के दौरान मादा चीतों के साथ हिंसक व्यवहार सामान्य है। ऐसी स्थिति में निगरानी टीम द्वारा हस्तक्षेप की संभावना लगभग न के बराबर होती है। इससे पहले साशा और उदय चीता की भी कूनो में मौत हो चुकी है।