केंद्रीय मंत्री अमित शाह की भोपाल में 'आपात बैठक' के बाद अब मप्र में भाजपा में अगले कुछ ही दिनों में कुछ नए दृश्य देखने को मिल सकते हैं। अभी तक अलग अलग सुर अलाप रहे तमाम बड़े नेताओं के सुर बदल सकते हैं और सामूहिक नेतृत्व का नजारा सामने आएगा। शाह ने जो बैठक ली है, वह अभी शुरूआत ही है तथा अगले महीने शाह फिर ऐसी ही बैठक भोपाल या दिल्ली में लेने वाले हैं, जहां पहली बैठक के दिये गये निर्देशों पर अमल की समीक्षा होगी और जरूरी हुआ तो बदलाव भी होंगे।

विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि रात की बैठक में शाह के सुर अपेक्षाकृत संयत मगर उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह जरूर कहा कि कार्यकर्ताओं में असंतोष की भावना का उभरना ठीक नहीं हैं और यह निश्चित तौर पर भाजपा के भीतर की किसी खामी के चलते हुआ है। इसे दूर करने के लिये नेताओं को एकजुट रहने व एकजुट दिखने की जरूरत है। मैं सीधे नजर रखूंगा।

शाह ने मप्र में भाजपा संगठन में अनुशासनहीनता के उभरे मामलों पर भी परोक्ष तौर पर नाराजगी जताई। शाह ने केंद्रीय मंत्री व चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की 'हैसियत' को भी साफ तौर पर समझा दिया है। उन्होंने मप्र के नेताओं को बता दिया है कि यह दोनों उनकी तरफ से भी फैसले लेंगे और यह सभी को मान्य होंगे। यह संकेत उन्होंने मप्र के उन नेताओं को दिए हैं जो दोनों मंत्रियों के अनुभव व कद को लेकर कुछ ' बातें' कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि शाह मप्र के आगामी विस चुनाव की जिम्मेदारी सीधे तौर पर अपने पास रखे हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो शाह ने मप्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया का पर्याप्त उपयोग करने के लिए भी कहा है। शाह ने सिंधिया से भी मुखातिब होकर कहा कि वे मप्र को ज्यादा समय देने की कोशिश करें, इसके अलावा कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल को भी संगठन के कामों में प्रमुखता से शामिल करने के लिए कहा गया है।

माना जाता है कि भूपेंद्र यादव व वैष्णव सभी नेताओं के दौरे कार्यक्रम को डिजाइन करेंगे और तोमर इसे सूत्रधार के तौर पर अमल कराएंगे। इसी तरह मप्र के पांच हिस्सों में विजय संकल्प यात्रा के मप्र के प्रस्ताव को भी शाह ने मंजूरी दे दी है और इसमें मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, अध्यक्ष वीडी शर्मा, तोमर, विजयवर्गीय, सिंधिया, पटेल समेत सभी चेहरों को जिम्मेदारी देने के लिये भी कहा है।