मध्यप्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के दौरान कांग्रेस द्वारा विधानसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखा और तर्कपूर्ण जवाब दिया। मुख्यमंत्री शिवराज ने न सिर्फ अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं बल्कि कांग्रेस के आरोपों का धारधार जवाब भी दिया। इसी बीच हल्की नोकझोंक भी देखी गई।
 
अविश्वास प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री शिवराज ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसा लचर अविश्वास प्रस्ताव मैंने तो देखा ही नहीं है। अगर अविश्वास की बात करें तो कांग्रेस में कौन किस पर विश्वास करता है समझ में ही नहीं आता है।

सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए सीएम ने कहा, कोरोना संकट से निबटने के लिए कांग्रेस की सरकार ने कोई तैयारी नहीं की थी। मेरी सरकार के पौने दो साल तो कोरोना से निबटने में ही निकल गए। 500 से ज्यादा बैठकें मैंने कीं। दिन-रात हमारी सरकार ने काम किया।

वहीं जनजातीय समाज के लिए किए गए अपने काम गिनाते हुए सीएम शिवराज बोले कि मध्यप्रदेश की धरती पर जनजातीय समाज के कल्याण के लिए पेसा एक्ट लागू करने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया, कांग्रेस ने केवल झुनझुना पकड़ाने, छल करने का काम किया है।

हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन योजना शुरुआत की, लेकिन मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने यह योजना शुरू ही नहीं की। प्रधानमंत्री ने गरीब परिवारों के लिए आवास योजना शुरू की, लेकिन मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने मकानों के प्रस्ताव भी लौटा दिए और राज्य के अंश की राशि भी कम कर दी, जिससे लाखों गरीब परिवारों के मकान का सपना टूटा।

जब तक कांग्रेस की सरकार थी बैगा, सहरिया, भारिया सहित अन्य जनजातीय समुदाय के पात्र हितग्राहियों के खातों में राशि नहीं पहुंची थी। कांग्रेस ने जनजातीय समुदाय के साथ भी धोखा किया।

गरीबों के कल्याण के लिए शुरू की गई संबल योजना से लाखों गरीबों के नाम कांग्रेस की सरकार ने काट दिए। हमने बच्चों को लैपटॉप देने की योजना शुरू की थी, कांग्रेस सरकार ने लैपटॉप बांटना भी बंद कर दिया था। 

इससे पहले बुधवार रात एक बजे तक अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस बीच सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामा भी हुआ। हालांकि इस दौरान कमलनाथ सदन में मौजूद नहीं थे। इससे कांग्रेस खेमे का मनोबल भी कमजोर नजर आया। आज बहस के दौरान सदन में जय श्री राम और जय जय सियाराम के नारे गूंजते रहे। इस बीच, सदन में नेताओं का झगड़ा और परिणामी नाराजगी इस हद तक बढ़ गई कि कांग्रेस ने मां सीता पर मंत्री मोहन यादव के बयान के विरोध में वाकआउट कर दिया।

कांग्रेस सरकार ने भाजपा के विधायकों, नेताओं से बदले की भावना से नियम विरुद्ध जाकर कार्रवाई करने की कोशिश की। संपत्तियों को नेस्तनाबूद करने का कुचक्र रचा, कई दुकानें तोड़ी गईं।हमने राजनीतिक विद्वेष में कभी कोई कार्रवाई नहीं की। प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने के लिए गुंडे, माफिया, बदमाशों पर कार्रवाई की, उनकी अवैध संपत्तियों को तोड़ा। लेकिन कांग्रेस सरकार ने भाजपा को निशाना बनाया था।