मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र में कांग्रेस द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ढाई घंटे तक धाराप्रवाह में अपनी बात रखी। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा भी किया। जिसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
बड़ी बात यह रही कि जब मुख्यमंत्री प्रस्ताव पर सदन में जवाब दे रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सदन में मौजूद नहीं थे। अविश्वास प्रस्ताव के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कमलनाथ सरकार में 165 दिन में 450 आईएएस और आईपीएस के ट्रांसफर किए। 15 हजार से ज्यादा तबादले किए गए। वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बन गया था।
सीएम ने आगे कहा कि यदि कांग्रेस सरकार ने जनकल्याण और प्रदेश के विकास के लिए कार्य किया होता, तो उनकी ही सरकार के मंत्री उन्हें छोड़कर हमारे साथ न आते। हमारे पास आए साथियों का फैसला सही था और जनता ने उन्हें उपचुनाव में भारी बहुमत से फिर से निर्वाचित किया। किसान कर्जामाफी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने उंगलियों पर गिनकर कहा था कि किसानों का कर्जा माफ नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री बदल दूंगा। आपने कर्जमाफी का कचरा कर दिया।
सीएम के इस बयान पर पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि 27 लाख किसानों का कर्जा माफ हुआ है। इसपर सीएम शिवराज ने कहा, 'सचिन भाई इस उम्र में इतना गुस्सा ठीक नहीं। सीएम ने फिर कहा- कमलनाथ की सरकार ने भ्रष्टाचार का लोकव्यापीकरण किया। कभी कलेक्टर-एसपी की पोस्टिंग में पहले पैसे नहीं लिए गए। लेकिन, कमलनाथ जी की सरकार में पैसे लेकर एक जिले में तीन-तीन कलेक्टर बदले। बात ये होती थी कि कौन कितने ज्यादा देने वाला है।
सीएम के वक्तव्य के दौरान विपक्ष के हंगामे पर स्पीकर गिरीश गौतम ने कहा, आप अविश्वास प्रस्ताव लाए, आरोप लगाए, अब सीएम को सुन तो लीजिए। मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि डेढ घंटे में सीएम का भाषण बिना बाधा के दो मिनट भी नहीं चल पाया। प्रतिपक्ष के दोनों नेता गायब हैं। मेरा अनुरोध है कि अपना नेता चुन लें।