भोपाल: नये पेसा नियमों के तहत पिछली बार की तरह इस बार भी आगामी 15 दिसम्बर तक आदिवासी बहुल जिलों की ग्राम सभाओं से तेंदूपत्ता विदोहन की सहमति ली जायेगी। यह सहमति मप्र लघु वनोपज सहकारी संघ लेगा जिसके लिये संबंधित वनमंडलों के डीएफओ को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। दरअसल ये डीएफओ लघुवनोपज संघ की जिला यूनियन के प्रबंधक भी होते हैं। जो ग्राम सभा स्वयं से तेंदूपत्ता तोडक़र उसका संग्रहण एवं विक्रय करना चाहती है, उसे 15 दिसम्बर तक अपनी सहमति देनी होगी।
उल्लेखनीय है कि पेसा नियम के तहत लघु वनोपजों एवं तेंदूपत्ता के संग्रहण एवं विपणन का अधिकार अब जनजाति समुदाय द्वारा निर्धारित किया जाता है। पिछली बार पेसा नियम के तहत प्रदेश के 20 जिलों की 268 ग्राम सभाओं से निर्धारित अवधि में तेंदूपत्ता संग्रहण एवं विपणन स्वयं करने के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। परन्तु मौसम प्रतिकूल रहने से इस साल माह अप्रैल-मई में भी कई बार वर्षा हुई एवं बादल छाये रहे तथा तापमान ज्यादातर 40 डिग्री से कम ही रहा। इस कारण से 268 ग्राम सभाओं ने लक्ष्य 28 हजार 10 मानक बोरा के स्थान पर 13 हजार 357 मानक बोरा तेंदूपत्ता ही संग्रहित किया जोकि लक्ष्य का 48 प्रतिशत था। इस तेंदूपत्ता संग्रहण के विपणन में 4 करोड़ रुपये की राशि पारिश्रमिक के रुप में प्राप्त हुई वहीं 3 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि लाभ के रुप में प्राप्त हुई। अगले साल वर्ष 2024 हेतु कितनी ग्राम सभायें सहमति देंगी और उस दौरान मौसम कैसा रहेगा, यह आगे पता चल पायेगा।