छतरपुर जिले के लवकुश नगर की एसडीएम निशा बांगरे पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से उनका इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है लेकिन यह कहा जा रहा है कि निशा बांगरे इन दिनों राजनीति में आने की तैयारी में जुटी हैं।

निशा बांगरे ने अपने इस्तीफे का कारण खुद के घर के गृह प्रवेश के मौके पर सर्वधर्म शांति सम्मेलन में शामिल होने की अनुमति न मिलने को बताया है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि निशा बांगरे ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते न सिर्फ इस्तीफ़ा दिया बल्कि सुनियोजित तरीके से इसे अधिकारों की लड़ाई से भी जोड़ दिया।  

सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा है कि एसडीएम निशा बांगरे करीब एक साल पहले ही अपने करीबियों के सामने राजनीतिक में आने की इच्छा जाहिर कर चुकी थीं। अंतर्राष्ट्रीय सर्वधर्म शांति सम्मेलन और विश्व शांति पुरस्कार सम्मान समारोह सहित अन्य कार्यक्रमों में भी वे केंद्रीय भूमिका में नजर आ रही थीं। 

यही नहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि दलित बाहुल्य आमला सीट के एक सर्वे में भी जनता ने बतौर विधायक उनके नाम को पसंद किया था। इसके बाद से ही निशा बांगरे प्रशासनिक सेवा के इस्तीफा देने का मन बना चुकीं थीं।

गौरतलब है कि दरअसल डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने 19 मई को मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग को 25 जून को होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति के लिए आवेदन दिया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने चाही गई अनुमति के कृत्यों को मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 9 (2) के अंतर्गत अनुमत्य नहीं होने एवं नियम 16 (2) के अंतर्गत अनमत्य गतिविधियों में शामिल नहीं होने का हवाला देकर नियमों के आलोक में कार्यक्रमों/ यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। बताया जा रहा है कि बैतूल कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि अगर निशा बांगरे कार्यक्रम में शामिल होती है तो शासन को तुरंत अवगत कराया जाए। इसके बाद निशा बांगरे ने पद से इस्तीफा दे दिया था।