Maihar News: माउंटेन मांझी फ़िल्म का एक मशहूर डायलॉग हैं कि भगवान के भरोसे मत बैठो हो सकता है भगवान तुम्हारे भरोसे बैठा हो इस डायलॉग को मैहर जिले के रामनगर के ग्रामीणों ने रिक्रिएट कर दिखाया हैं। नगर परिषद अन्तर्गत आने वाली करौंदी बस्ती के ग्रामीण वर्षो से जलभराव का दंस झेलते आ रहे हैं शासन प्रशासन की चौखट में दस्तक देने के बाद भी सुनवाई नही तो ग्रामीणों ने खुद पुल बनाने का बीड़ा उठाया और एक लकड़ी के पुल का निर्माण कर दिया, ग्रामीणों की इस पहल ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन और तंत्र को आइना दिखाया है बल्कि विकास की बिगुल फूंकने वाली सरकार दावों को भी खोखला साबित दिया है।

मध्य प्रदेश के मैहर के करौंदिया गांव के लोगों ने प्रशासनिक उपेक्षा झेलते हुए खुद ही बांस का पुल बनाकर सरकार की बेरुखी से निराश होने के बजाय मिसाल कायम की है। उन्होंने एकता की मिसाल देते हुए नदी पर बांस का पुल बनाकर अपना रास्ता खुद ही तैयार कर लिया। 

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पिछले 11 दिनों से अपने घरों में फंसे ग्रामीणों की शिकायत जब जिला प्रशासन ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने लकड़ी का पुल बना डाला।

मामला मैहर जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी दूर करौंदिया गांव का है। बताया जाता है कि यह गांव नगर पालिका परिषद न्यू रामनगर का हिस्सा है, लेकिन एक दशक से नगर परिषद यहां रहने वाले लोगों के लिए एक पुल तक मंजूर नहीं कर पाई है।

करौंदिया गांव में करीब सौ परिवार रहते हैं। जिनकी स्कूलिंग, कॉलेज, खेती और रोजगार के साधन पूरी तरह बाहरी क्षेत्र पर निर्भर हैं। लेकिन बरसात के दिनों में सड़क की हालत खराब हो जाती है। नदी के बहाव के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं। पानी कई फीट ऊपर तक बहता है। किसान खेतों तक नहीं पहुंच पाते। पहुंच की कमी के कारण मरीज अपने घरों तक ही सीमित रहते हैं। कुल मिलाकर पुलों की कमी ने सभी का जीवन बहुत कठिन बना दिया।

इस संबंध में ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन से उचित कदम उठाने की मांग की। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। हाल ही में जिलाधिकारी ने भी सात दिन के अंदर सड़क व पुल की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं हुआ.

करौंदिया गांव के निवासियों ने बताया कि गांव के सभी लोग पहले से बांस-बल्ली इकट्ठा कर रखे थे। इसके बाद इसे उठाने में करीब 11 दिन लग गए।

यह पुल वैकल्पिक रूप से बनाया गया है। इस पुल के नीचे से नदी बह रही है। ऐसे में पुल का बेस ठीक से नहीं बन पाता है। यदि एक साथ दो से तीन लोग गुजरें तो टूटने का खतरा रहता है। ऐसे में लोग एक के बाद एक पुल पार कर रहे हैं। बच्चों को भी एक-एक करके बड़ी सावधानी से पुल पार कराया जा रहा है।