भोपाल: प्रदेश में अब कृषि विश्वविद्यालयों में बीज एवं परीक्षण तथा कृषि उपज मंडी समितियों में मिट्टी के परीक्षण की सुविधा हेतु प्रयोगशालाओं की स्थापना हेतु राज्य विपणन विकास निधि से राशि नहीं मिलेगा। इसके लिये राज्य सरकार ने मप्र कृषि उपज मंडी राज्य विपणन विकास निधि नियम 2000 में तेईस साल बाद बदलाव किया है तथा यह नया बदलाव आगामी 28 अप्रैल 2023 के बाद प्रभावशील किया जायेगा।

इसी प्रकार, नियमों में तीन अन्य नये बदलाव भी किये गये हैं। एक, कृषि विश्वविद्यालय, शासकीय विभागों तथा शासकीय उपक्रमों को बीजों के उत्पादन और उद्यानिकी एवं अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिये नई प्रजातियों, रोपण सामग्री का क्रय तथा सामग्री की परीक्षण सुविधा के लिये लागत का 90 प्रतिशत से अधिक अनुदान उक्त निधि से नहीं दिया जायेगा। दो, कृषि एवं सहबध्द क्षेत्रों के विश्वविद्यालय, विभागीय उपक्रम तथा कृषि विज्ञान केंद्रों में अधोसंरचना निर्माण हेतु लागत का 90 प्रतिशत तक ही अनुदान दिया जायेगा। तीन, शासकीय विभागों व शासकीय विभागों के अंतर्गत स्थापित उपक्रमों तथा संस्थाओं को कृषि और सहबध्द क्षेत्रों में अनुसंधान से जुड़े हुये अधोसंरचना विकास परियोजनाओं या अनुसंधान से जुड़े हुये अन्य क्रियाकलापों के लिये कुल लागत के 90 प्रतिशत के बराबर तक अनुदान उक्त निधि से दिया जा सकेगा।

नियमों में एक बदलाव यह भी किया गया है कि निधि से अनुदान मंजूरी हेतु अब समिति कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में रहेगी जिसमें प्रमुख सचिव कृषि तथा संचालक उद्यानकी, संचालक कृषि, संचालक अनुसंधान सेवायें कृषि विवि जबलपुर एवं ग्वालियर, संचालक अनुसंधान सेवायें वेटनरी यूनिवर्सिटी जबलपुर और एमडी राज्य मंडी बोर्ड सदस्य रहेंगे।

ओट की खरीद फरोख्त अब मंडियों में होगी :

इधर राज्य सरकार ने जई यानि ओट को अधिसूचित कृषि फसलों की सूची में शामिल कर लिया है जिससे अब इसकी खरीद फरोख्त अनिवार्य रुप से कृषि उपज मंडियों में ही नीलामी के जरिये हो सकेगी। ओट के उत्पादक अपनी फसल कृषि उपज मंडियों में लायेंगे तथा मंडी में इसका नीलामी के जरिये विक्रय होगा। इससे ओट के उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।