मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब धर्म ग्रंथों की शिक्षा दी जाएगी। गीता का सार और रामायण महाभारत के प्रसंग पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में विद्या भारती के सुघोष दर्शन कार्यक्रम में ये ऐलान किया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विद्या भारती के सुघोष दर्शन कार्यक्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के तीन उद्देश्य ज्ञान-कौशल और नागरिकता के संस्कार देना हैं। विद्या भारती इन तीनों उद्देश्यों को पूरा कर रही है। राज्य सरकार भी बेहतर शिक्षा देने के लिए काम कर रही है।
सीएम शिवराज ने कार्यक्रम में कहा कि कुछ लोग देश में ऐसे हैं जिन्हें हमारी संस्कृति-परंपरा, जीवन- दर्शन, महापुरुष आध्यात्म और धर्म की आलोचना करने में आनंद आता है। वो यह नहीं जानते कि राम के बिना यह देश जाना नहीं जाता। राम हमारे रोम रोम में बसे हैं। सुख और दुख दोनों में राम का नाम लिया है।
मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों को चेताया है जो हिंदू ग्रंथों के साथ महापुरुषों का अपमान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा जो महापुरुषों का अपमान करते हैं उन्हें सहन नहीं किया जाएगा। सीएम शिवराज ने ने कहा कि क्रांति वीरों ने अपनी शहादत दी है लेकिन आज मन में तकलीफ होती है कि आजादी के इतने लंबे समय बाद भी शहीदों का स्मरण नहीं किया जाता।