मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का एकमात्र सबसे बड़ा नर्सिंग महाविद्यालय हमीदिया में अव्यवस्था का बोलबाला है। नियम कानून को ताक पर रखकर हर काम यहाँ होते है जिसका उदाहरण कालेज की मान्यता बचाने के लिये स्टाफ नर्सो को प्रोफेसर व असिटेंड प्रोफेसर बनाकर कालेज मे रखने का और कुछ को बाहर करने और कुछ को वही उपकृत करने का है।
आपको बता दे कॉलेज प्रबंधन हमीदिया भोपाल ने अपने चहेतो को उपकृत कर नियमों को दरकिनार कर 16 स्टाफ नर्सों को प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर बना दिया जबकी नवीन पद स्वीकृत ही नही है। दरअसल नर्सिंग कॉलेज में सीट की मान्यता के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल की टीम आने वाली थी. तब आनन-फानन में यहां 60 से ज्यादा स्टाफ की भर्ती की गई। इसमें अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ नर्स को शामिल किया गया। जो पात्रता रखती है और विभाग द्वारा जब भी पदोन्नति की जाएगी तो सिस्टर ट्यूटर बनाया जाएगा। इनकी भर्ती सही है। लेकिन इन स्टाफ नर्सो से दोहरा काम कराया जा रहा है ।
विवाद की मुख्य वजह
नर्सिंग कालेज की मान्यता के सम्बध मे दिल्ली से कालेज का निरीक्षण करने टीम आई और निरीक्षण भी हो गया। इसके बाद अस्पताल में स्टाफ की कमी बताते हुए कुछ स्टाफ को वापस हमीदिया अस्पताल भेजने की कार्रवाई की गई। इसके बाद से ही विवाद की स्थिति बनी है। जिन कर्मचारियों को वापस किया गया है उनका कहना है कि कॉलेज प्रबंधन अपने चहेते कर्मचारियों उच्च पदों अपात्र स्टाफ नर्स को प्रभारी प्राचार्य एवं प्रभारी उप प्राचार्य तथा प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर कूल 16 लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से लाभ दिया गया है इनकी नियुक्ति की जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी पर कालेज प्रबंधक द्वारा इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है 16 कर्मचारियों का नाम छुपाया जा रहा है जो अपात्र हैं ।
भर्ती निरस्त हो और जो हकदार है उन्हे रखना चाहिये
इनकी भर्ती को निरस्त कर चिकित्सालय में वरिष्ठ कार्य अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को नर्सिंग कॉलेज मैं प्रभार दिया जा सकता है जब तक पदोन्नति पर रोक लगी है उन कर्मचारियों को वरिष्ठता के रूप में कार्यवाहक ट्यूटर प्राचार्य उप प्राचार्य प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर दिया जा सकता है इसमें मध्यप्रदेश शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग को इस प्रकार की कार्रवाई वरिष्ठ सिस्टर ट्यूटर और वरिष्ठ स्टाफ नर्स को कार्यवाहक के रुप पदस्थापना करनी चाहिए जो इसके हकदार हैं ।
आईएनसी एवं मध्यप्रदेश शासन के नियम निर्देशों का पालन नहीं हुआ
जिस प्रकार गृह विभाग ने कार्यवाहक में पदोन्नति का लाभ दिया गया है उसी प्रकार चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी लाभ दिया जाना चाहिए परंतु विभाग किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा है अपात्र को और कनिष्ठ को भ्रष्टाचार अनियमितता कर लाभ दिया गया है जिसमें आईएनसी भारत सरकार नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश शासन के नियम निर्देशों का पालन नहीं हुआ है
कमिश्नर को अंधेरे में रखकर किया गुमराह
मध्य प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से संचालित मेडिकल कॉलेज नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेजों में धांधली बड़े पैमाने पर की जा रही है ।यहां मनमानी तरीके से विज्ञप्ति निकाली जाती है और अपने तरीके से लोगों को पदस्थ कर दिया जाता है। तो वहीं जूनियर को सीनियर के ऊपर बिठा कर सीनियरो की बेज्जती कराई जाती है। इसी तरह का मामला हमीदिया नर्सिंग कॉलेज में देखने को मिला संभागीय कमिश्नर इन तमाम सारी संस्थाओं के पदेन अध्यक्ष होते हैं और इनके ही अंडर में पदस्थापना से लेकर भर्ती तक करने का काम किया जाता है। इस पूरे मामले में हमीदिया नर्सिंग कॉलेज के प्रबंधन ने कमिश्नर को अंधेरे में रखकर उन्हें गुमराह करके इस तरह की पदस्थापना की है जिससे कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर भी संदेह पैदा कर दिया है कमिश्नर को इस पूरे मामले में स्वयं संज्ञान लेना चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच कराना चाहिए कि 16अपात्र जूनियर स्टाफ नर्स को सीनियर लोगों के ऊपर कैसे पदस्थ कर दिया और उनकी पदस्थापना नाम बदलकर कैसे की गई यदि कमिश्नर इसकी जांच करवाएंगे तो निश्चित ही दूध का दूध औरपानी का पानीहो जाएगा और दोषियों के खिलाफ फिर कमिश्नर को कार्रवाई करने में जरा भी देरी नहीं लगेगी।