भोपाल: राज्य के वन विभाग ने अवैध कटाई, खनन, अतिक्रमण एवं वन्यप्राणियों के शिकार को रोकने के दौरान स्थानीय रहवासियों से वनकर्मियों का द्वन्द रोकने के लिये सभी जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं डीएफओ को निर्देश जारी कर कहा है कि वे हर माह जिला टास्क फोर्स की बैठकें बुलायें।

उल्लेखनीय है कि पिछले माहों में विदिशा के लटेरी में वन में अवैध कटाई पर वनकर्मियों का स्थानीय रहवासियों से द्वन्द हुआ था जिस पर एक रहवासी की गोली लगने से मृत्यु हो गई थी। इस पर जांच आयोग भी गठित हुआ है। वहीं मालवा क्षेत्र में रहवासियों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण कर वनकर्मियों की बन्दूकें लूटने का मामला भी घटित हुआ था। चूंकि वन कर्मियों को बन्दूक से सिर्फ आत्मरक्षा के लिये गोली चलाने का अधिकार है तथा उसे अकेले ही स्थानीय लोगों से भिडऩा पड़ता है, इसलिये अब राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि अवैध कटाई, खनन, अतिक्रमण एवं वन्यप्राणियों के शिकार  रोकने के लिये वन अमला अकेले कर्यवाही नहीं करे बल्कि जिला प्रशासन एवं पुलिस का भी सहयोग लिया जाये।

इसीलिये वन विभाग के सचिव अतुल मिश्रा ने सभी कलेक्टरों, एसपी एवं डीएफओ को पत्र जारी कर कहा है कि वन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिये प्रत्येक जिले में टास्क फोर्स का गठन किया गया है तथा लेकिन इसकी बैठकें नियमित रुप से हर माह नहीं हो रही हैं। यह बैठक नियमित रुप से आयोजित न होना जिला स्तर पर समन्वय का अभाव दर्शाता है। इसलिये डीएफओ जिले में गठित टास्क फोर्स की हर माह बैठकें आयोजित करायें और बैठक में लिये गये निर्णयों एवं की गई कार्यवाही की जानकारी शासन को भी भेजें। पत्र में जिला टाईगर सेल की भी बैठकें आयोजित करने के लिये कहा गया है। टास्क फोर्स की बैठक में वन व्यवस्थापन, वन भूमि के संबंध में वन-राजस्व भूमि के विवादों पर भी समीक्षा करने के लिये कहा गया है।

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार ने तेरह साल पहले 21 सितम्बर 2010 को सभी जिलों में कलेक्टर की अध्यक्षता में टास्क फोर्स गठित किया गया था जिसमें पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी भी सदस्य के रुप में शामिल हैं। लेकिन इस टास्क फोर्स की बैठकें नियमित रुप से नहीं हो रही थी तथा वनकर्मियों एवं स्थानीय रहवासियों के बीच द्वन्द हो रहा था।