राज्य की शिवराज सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि का लैंड बैंक बनाया है। इसके जरिये निवेशकों को 90 वर्ष के पट्टे पर भूमि दी जायेगी। खास बात यह है कि निवेशक को वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने के लिए इस भूमि को गिरवी रखने की अनुमति भी होगी। यही नहीं बल्कि सरकार ने पट्टे की भूमि को स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से छूट देने का भी मानस बना लिया है। ग्लोबल इंवेस्टर समिट के सुझावों पर यह प्रयोग शुरू हो रहा है।  

सूत्रों का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष निवेश मित्र नीति बनी है। इसमें सस्ती एवं आसान दरों पर निवेशकों को शासकीय भूमि का आवंटन, हेरिटेज संपत्तियों का आवंटन, निजी निवेश पर पूंजी निवेश अनुदान, मार्ग -सुविधा केंद्र नीति, जल पर्यटन नीति, ब्रांडेड होटल प्रचार नीति और फिल्म पर्यटन नीति शामिल है। इन नीतियों के माध्यम से प्रदेश में निवेश आमंत्रित किए जा रहे हैं। इनके लिये ही जमीनों की सौगातें तैयार की गई हैं। इसके अलावा नये क्षेत्रों में परियोजना स्थापित करने पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा। 

बताया जाता है कि कुछ महीने पहले इंदौर में तीन दिन चली ग्लोबल इंवेस्टर समिट में पर्यटन विभाग ने देश-विदेश के निवेशकों को मध्य प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निशेष के लाभ बताते हुए इसमें अपार संभावनाएं बताई थी और निवेश के लिए आमंत्रित किया था। निवेशकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग ने हेरिटेज प्रापर्टी बैंक बनाया है।  

पांच पर्यटन जोन

इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, खजुराहो और भोपाल को पांच भाग में पर्यटन जोन के रूप में बांटा जा चुका है। इन क्षेत्रों में लग्जरी होटल, हेरिटेज होटल, कन्वेंशन सेंटर, गोल्फ कोर्स, एयरो स्पोर्ट्स, साहसिक और जल पर्यटन परियोजनाएं, मनोरंजन पार्क, रिसार्ट, वाइल्ड लाइफ रिसार्ट, वेलनेस रिसार्ट, स्टैंडर्ड होटल स्थापित करने के लिए भी निजी निवेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है। खासतौर पर जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 22 जल संरचना चिह्नित की गई हैं। यह लगभग तीन हजार वर्ग किलोमीटर वाले हैं। वन्यजीव क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने, बड़ी और मेगा परियोजनाओं में निवेश आकर्षित करने पर भी सरकार की नजर है और नीति में प्रावधान हैं।